जगदलपुर/रायपुर : मनाली में मौत के मुहाने से लौटे 33 छात्र-छात्राएं और प्रोफेसर

जगदलपुर/रायपुर(खबरो का राजा) : क्रांतिकारी देब्रिधुर शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, जगदलपुर (एमजीयूवीवी, दुर्ग) के उत्तर भारत शैक्षणिक भ्रमण पर गए 33 छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों सहित एक भीषण सड़क हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। यह हादसा मनाली भ्रमण के अंतिम दिन 11 दिसंबर को शाम लगभग साढ़े सात बजे उस समय हुआ, जब पर्यटक बस के चालक को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ गया और चलती बस अनियंत्रित हो गई।
बस में सवार भ्रमण प्रभारी शिक्षक डॉ. रामकुमार देवांगन ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भांपते हुए अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। बिना एक पल गंवाए वे चालक की सीट तक पहुंचे, स्टेयरिंग अपने हाथ में लिया और हैंड ब्रेक लगाकर बस को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसी दौरान बस सड़क किनारे खड़ी एक ट्रक से टकरा गई।तेज टक्कर के कारण डॉ. देवांगन की कलाई गंभीर रूप से टूट गई, लेकिन उनकी तत्परता और साहस से बस गहरी खाई में गिरने से बच गई। यदि बस खाई में गिर जाती, तो दर्जनों लोगों की जान जा सकती थी।
इस संकट की घड़ी में भ्रमण के अन्य सहयोगी शिक्षक डॉ. अमित कुमार पैकरा, डॉ. अग्निवह हक़दार एवं डॉ. ममता भगत ने भी साहसिक भूमिका निभाते हुए स्थिति को संभाला और सभी विद्यार्थियों को सुरक्षित रूप से दिल्ली तक पहुंचाया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो बड़ी जान-माल की हानि हो सकती थी। हादसे के तुरंत बाद डॉ. देवांगन को प्राथमिक उपचार दिया गया, तत्पश्चात उन्हें दिल्ली रेफर किया गया, जहां उनकी कलाई का सफल ऑपरेशन किया गया।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि, यह घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक थी, किंतु हमारे भ्रमण प्रभारी शिक्षक डॉ. रामकुमार देवांगन द्वारा दिखाई गई असाधारण सूझबूझ, साहस और त्वरित निर्णय ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा, जो संपूर्ण शिक्षकीय समुदाय के लिए गर्व की बात है। महाविद्यालय परिवार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है और उनके इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें नमन करता है। साथ ही, भ्रमण में सम्मिलित सभी सहयोगी शिक्षकों की भूमिका भी सराहनीय रही, जिनके समन्वय से सभी विद्यार्थी सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
वर्तमान में डॉ. देवांगन अपने निवास पर चिकित्सकीय निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। छात्रों, अभिभावकों एवं सहकर्मियों ने उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने संकट की घड़ी में केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक सच्चे अभिभावक की भूमिका निभाई। यह घटना सतर्कता, त्वरित निर्णय और जिम्मेदार नेतृत्व का जीवंत उदाहरण है, जो यह सिद्ध करती है कि सही समय पर उठाया गया एक साहसिक कदम कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है।





