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पेंड्रा : बुलडोज़र गया, हिम्मत लौटी! शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा फिर सक्रिय, अफसर–भू-माफिया गठजोड़ बेनकाब..?

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (खबरो का राजा) — जिले के ग्राम पंचायत पदगवां में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का मामला प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद थमता नजर नहीं आ रहा है। गुरुवार को प्रशासन और पंचायत के संयुक्त प्रयास से शासकीय भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई की गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कुछ ही समय बाद उसी भूमि पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू हो गया, जिससे पूरे प्रकरण की गंभीरता और नीयत पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पदगवां स्थित खसरा नंबर 874/2, जो स्पष्ट रूप से शासकीय खाते में दर्ज भूमि है, वर्षों से एक स्थानीय व्यक्ति के अवैध कब्जे में रही। कब्जाधारी ने न केवल इस भूमि पर अवैध निर्माण शुरू किया, बल्कि कानून को ठेंगा दिखाते हुए हाल ही में इसे एक तीसरे व्यक्ति को बेच भी दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि खरीदार ने भी बिना किसी वैधानिक अनुमति के निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया, जिससे गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत के सरपंच एवं समस्त पंचों की सर्वसम्मति से प्रकरण को प्रशासन के संज्ञान में लाया गया। इसके पश्चात तहसीलदार एवं पटवारी ने मौके पर पहुंचकर राजस्व अभिलेखों की जांच की। जांच में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि संबंधित भूमि शासकीय है, जिसका न तो विक्रय किया जा सकता है और न ही उस पर किसी प्रकार के निजी निर्माण की अनुमति दी जा सकती है। इसके बाद तहसीलदार द्वारा निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए गए।

हालांकि, प्रशासनिक कार्रवाई के कुछ ही समय बाद उसी भूमि पर दोबारा निर्माण कार्य शुरू हो जाना कई गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब प्रशासन द्वारा निर्माण रोक दिया गया था, तो फिर किसके संरक्षण में दोबारा काम शुरू हुआ? क्या इसमें ग्राम पंचायत स्तर पर किसी की संलिप्तता है, या फिर प्रशासनिक उदासीनता अथवा मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता? ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर इस तरह खुलेआम कब्जा और अवैध निर्माण जारी रहा, तो इससे न केवल शासन की नीयत पर सवाल उठेगा, बल्कि कानून-व्यवस्था की साख भी कमजोर होगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और अवैध निर्माण को तत्काल व स्थायी रूप से हटाया जाए। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और शासकीय भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए क्या ठोस एवं निर्णायक कदम उठाए जाते हैं।

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