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जिले में गैस घोटाले की आहट: सिस्टम से छेड़छाड़ कर हो रही फर्जी डिलीवरी…,!

जिले में गैस घोटाले की आहट: सिस्टम से छेड़छाड़ कर हो रही फर्जी डिलीवरी…,!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।जिले में एलपीजी गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घरेलू गैस कनेक्शन धारकों द्वारा लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं को उनका हक का सिलेंडर समय पर नहीं मिल रहा, जबकि रिकॉर्ड में “डिलीवर” दिखाकर खेल किया जा रहा है।

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सबसे बड़ा आरोप डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) को लेकर सामने आया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे जब सिलेंडर बुक करते हैं, तो उन्हें एक डीएसी नंबर मिलता है, जिसे दिखाने पर ही डिलीवरी होनी चाहिए। लेकिन कई मामलों में बिना डीएसी नंबर दिखाए ही सिलेंडर “डिलीवर” दिखा दिया जा रहा है और उपभोक्ताओं के मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज पहुंच रहा है।

इतना ही नहीं, कुछ उपभोक्ताओं ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि उन्होंने गैस बुकिंग ही नहीं की, फिर भी उनके मोबाइल पर डीएसी नंबर जारी हो गया। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि सिस्टम के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी एंट्री की जा रही है और सिलेंडरों की हेराफेरी संभव है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल में गैस एजेंसी संचालकों और उनके कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। यदि यह सही है, तो यह न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखा है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल है। जरूरतमंद लोगों को सिलेंडर नहीं मिल रहा, जबकि कागजों में सब कुछ “नियमित” दिखाया जा रहा है।

यह भी आरोप लग रहे हैं कि कई जगहों पर होम डिलीवरी बंद कर दी गई है या जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को मजबूर होकर एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस दौरान बिचौलियों के सक्रिय होने की भी आशंका जताई जा रही है।

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अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर हर बार की तरह शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाएंगी? यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आम उपभोक्ताओं का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।

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