
केंदा स्कूल बना पेपर लीक का अड्डा ?, 5 दिन पहले करा दिया पेपर— अब नोटिस के नाम पर खानापूर्ति!
बिलासपुर/कोटा(जीशान,अंसारी)।जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। 11वीं कक्षा के गणित विषय का प्रश्न पत्र परीक्षा से पूरे 5 दिन पहले लीक हो जाना प्रशासनिक लापरवाही की बड़ी घटना बनकर सामने आया है। मामला उजागर होते ही 9 अप्रैल को प्रस्तावित परीक्षा को पूरे जिले में रद्द करना पड़ा, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

जानकारी के अनुसार, कोटा विकासखंड के केंदा स्थित शासकीय हाई सेकेंडरी स्कूल में 4 अप्रैल को ही गणित विषय की परीक्षा आयोजित कर ली गई थी, जबकि अधिकृत परीक्षा 9 अप्रैल को होनी थी। इसी दौरान प्रश्न पत्र बाहर पहुंचा और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह घटनाक्रम विभागीय समन्वय की कमी और निगरानी तंत्र की विफलता को साफ उजागर करता है।
जिला शिक्षा विभाग ने तत्काल 11 अप्रैल को पुनः परीक्षा आयोजित करने का आदेश जारी किया है और नए प्रश्न पत्र तैयार करने की बात कही है। लेकिन इस पूरे मामले ने छात्रों और अभिभावकों के भरोसे को गहरा झटका दिया है। विभाग का तर्क है कि दोहरी समय-सारिणी के कारण भ्रम की स्थिति बनी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी संवेदनशील परीक्षा में ऐसी लापरवाही कैसे हो सकती है? क्या इसे महज “तकनीकी चूक” कहकर जिम्मेदारी से बचा जा सकता है?

मामले में केंदा स्कूल के प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, अब चर्चा इस बात की ज्यादा है कि क्या यह नोटिस सिर्फ कागज़ों में ही दफन होकर रह जाएगा ? स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि अगर कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रही, तो यह पूरी प्रक्रिया महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
इस घटना ने शिक्षा तंत्र की साख को गहरा झटका दिया है। छात्रों की मेहनत, उनकी तैयारी और भविष्य—सब कुछ एक बड़ी लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। क्या जिम्मेदारों पर इस बार वास्तव में कड़ी कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह यह मामला भी जांच और नोटिस के बीच ही दबकर रह जाएगा? अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह सिर्फ एक पेपर लीक नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम की विश्वसनीयता पर स्थायी दाग बन जाएगा।













