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छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग का बड़ा प्रहार: 176 शिक्षक निलंबित, 14 का वेतन रोका, अब विभागीय जांच की मार

छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग का बड़ा प्रहार: 176 शिक्षक निलंबित, 14 का वेतन रोका, अब विभागीय जांच की मार

नई पोस्टिंग पर नहीं पहुंचे शिक्षक तो सरकार हुई सख्त, कहा- आदेश नहीं मानोगे तो कार्रवाई तय

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुली प्रशासनिक जंग में बदलता नजर आ रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शासन के आदेशों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेशभर में 176 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। वहीं 14 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है और 48 शिक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब आदेशों की अवहेलना करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कई शिक्षक नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग देने नहीं पहुंचे, जिसके बाद मजबूरन सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

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दरअसल, राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्था को खत्म करने के लिए बड़े स्तर पर युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया शुरू की थी। शासन का दावा है कि कई स्कूल ऐसे थे जहां जरूरत से ज्यादा शिक्षक पदस्थ थे, जबकि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल शिक्षक विहीन पड़े थे। इसी असंतुलन को ठीक करने के लिए 15 हजार 310 शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी किए गए।

लेकिन शासन की इस पूरी कवायद को तब बड़ा झटका लगा जब 303 शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग ही नहीं दी। कई शिक्षक आदेशों के खिलाफ खुलकर सामने आ गए, तो कुछ ने अलग-अलग कारण बताकर कार्यभार ग्रहण करने से दूरी बना ली। विभाग ने पहले समझाइश दी, नोटिस जारी किए, चेतावनी दी, लेकिन जब आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो सरकार ने सीधे निलंबन का डंडा चला दिया। सबसे ज्यादा कार्रवाई कांकेर जिले में हुई है, जहां अकेले 72 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा बलरामपुर, कोंडागांव, सुकमा, बस्तर, बीजापुर, रायगढ़, दुर्ग और रायपुर समेत कई जिलों में भी शिक्षकों पर गाज गिरी है। शिक्षा विभाग के भीतर इसे “अनुशासन बहाली अभियान” के रूप में देखा जा रहा है।

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सरकार यहीं नहीं रुकी। जिन शिक्षकों ने आदेशों को हल्के में लिया, उनके खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई। 14 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है, जिनमें सबसे ज्यादा मामले कोंडागांव जिले से जुड़े बताए जा रहे हैं। विभाग का मानना है कि अगर सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया जाता तो शासन की साख पर सवाल खड़े होते।

इधर 48 शिक्षकों पर विभागीय जांच शुरू होने के बाद अब कई शिक्षकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक कुछ मामलों में आरोप पत्र जारी किए जा चुके हैं और कई शिक्षकों से जवाब मांगा गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो निलंबन के बाद बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

इस पूरे मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। कई शिक्षक हाई कोर्ट पहुंच गए हैं और स्थानांतरण आदेशों को चुनौती दे रहे हैं। शिक्षकों का आरोप है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कई लोगों को बिना उचित कारण दूरस्थ क्षेत्रों में भेज दिया गया। हालांकि सरकार का रुख फिलहाल पूरी तरह सख्त दिखाई दे रहा है। विभाग ने साफ कहा है कि जब तक कोर्ट से कोई स्थगन आदेश नहीं मिलता, तब तक सभी शिक्षकों को नई पदस्थापना पर ज्वाइन करना ही होगा।

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश के शिक्षकों में बेचैनी का माहौल है। कई जिलों में शिक्षक संगठन भी सरकार के फैसले पर नाराजगी जता रहे हैं, लेकिन प्रशासन फिलहाल पीछे हटने के मूड में नजर नहीं आ रहा।

सरकार का कहना है कि यह केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश है। वर्षों से चली आ रही गड़बड़ियों और “मनचाही पदस्थापना संस्कृति” को खत्म करने के लिए यह जरूरी कदम बताया जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार की यह सख्ती शिक्षा व्यवस्था सुधार पाएगी या फिर यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा आंदोलन बन जाएगा। फिलहाल इतना तय है कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग ने साफ संदेश दे दिया है — “शासन के आदेश मानो, वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहो।”

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