BPM अरविंद सोनी की वापसी पर उठे सवालों की चर्चा थमी भी नहीं थी कि सामने आया स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा! सड़क किनारे मिली लाखों की दवाइयां,

BPM अरविंद सोनी की वापसी पर उठे सवालों की चर्चा थमी भी नहीं थी कि सामने आया स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा! सड़क किनारे मिली लाखों की दवाइयां,
सेमरदर्री स्वास्थ्य केंद्र में खुले में दवाइयां फेंके जाने का आरोप, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ की आशंका; क्या CMHO के नियंत्रण से बाहर हो चुका है स्वास्थ्य विभाग?

मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पेंड्रा में आरोपों से घिरे BPM अरविंद सोनी की पुनः पदस्थापना और उनकी ज्वाइनिंग को लेकर चर्चा अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब मरवाही के सेमरदर्री स्वास्थ्य केंद्र से कथित लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आ गया है।
मरवाही विकास खंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरदर्री के आसपास सड़क किनारे कचरे के ढेर में बड़ी मात्रा में दवाइयां और सिरप से संबंधित सामग्री पड़े होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कचरे में मिली दवाइयों की कीमत लाखों रुपये तक हो सकती है। हालांकि, दवाइयों की वास्तविक कीमत, उनकी एक्सपायरी स्थिति और उन्हें वहां किसने तथा क्यों फेंका, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

एक तरफ BPM की वापसी पर सवाल, दूसरी तरफ दवाइयों का कचरा—स्वास्थ्य विभाग में आखिर चल क्या रहा है?
स्वास्थ्य विभाग पहले ही BPM अरविंद सोनी की पुनः पदस्थापना को लेकर उठ रहे सवालों के कारण चर्चा में रहा है। अब सेमरदर्री में दवाइयों और मेडिकल वेस्ट के खुले में पड़े होने की बात सामने आने से विभागीय निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या स्वास्थ्य विभाग में जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है? क्या अधीनस्थ स्वास्थ्य संस्थानों की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है?और सबसे बड़ा सवाल—क्या CMHO के नियंत्रण से स्वास्थ्य विभाग की जमीनी व्यवस्था बाहर हो चुकी है?
स्कूल के पास मेडिकल वेस्ट, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि जिस इलाके में यह कचरा और दवाइयां पड़े होने की बात सामने आई है, उसके आसपास हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल भी संचालित होते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे यहां से गुजरते हैं। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि स्वास्थ्य केंद्र से निकला मेडिकल वेस्ट खुले में सड़क किनारे फेंका गया, तो यह केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों, ग्रामीणों और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाएगा। खुले में पड़ी दवाइयां बच्चों की पहुंच में आ सकती हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की जिम्मेदारी निभाने वाला तंत्र कहां है?
दवाइयों का स्टॉक खंगाला जाए, तो सामने आ सकता है बड़ा सच!
मामले में केवल मौके का निरीक्षण ही पर्याप्त नहीं होगा। स्वास्थ्य विभाग को यह भी जांचना चाहिए कि सड़क किनारे मिली दवाइयां आखिर किस स्टॉक से संबंधित हैं।
स्टॉक रजिस्टर में कितनी दवाइयां दर्ज हैं?कितनी दवाइयां मरीजों को वितरित की गईं?कितनी दवाइयां एक्सपायर हुईं?एक्सपायरी दवाइयों के निस्तारण का रिकॉर्ड कहां है?
मेडिकल वेस्ट उठाने और निस्तारित करने वाली अधिकृत व्यवस्था कौन सी है? यदि इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड से नहीं मिलते हैं, तो मामला और गंभीर हो सकता है।
चिकित्सकों की उपस्थिति पर भी ग्रामीणों के सवाल
मेडिकल वेस्ट के अलावा ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की समय पर उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है और यहां आने वाले मरीजों को समय पर उपचार मिलना चाहिए। ऐसे में विभागीय अधिकारियों को कागजी उपस्थिति रजिस्टर के बजाय अचानक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।
CMHO की निगरानी व्यवस्था पर सीधे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल आदेश जारी करने तक सीमित नहीं है। अधीनस्थ स्वास्थ्य केंद्रों में उन आदेशों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी भी विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
यदि किसी स्वास्थ्य केंद्र के आसपास सड़क किनारे दवाइयां और मेडिकल वेस्ट पड़े होने की स्थिति सामने आती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित निरीक्षण आखिर किस स्तर पर हो रहा था? एक के बाद एक मामले सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों को जवाब देना होगा कि आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी?
जांच सिर्फ खानापूर्ति न हो, जिम्मेदारी भी तय हो
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण, दवाइयों के स्टॉक और निस्तारण रिकॉर्ड की जांच तथा चिकित्सकों-कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति की जांच कराने की मांग की है। सड़क किनारे पड़े मेडिकल वेस्ट को तत्काल सुरक्षित तरीके से हटाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारित करने की भी मांग उठाई गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में सिर्फ कचरा हटाकर इतिश्री करता है या फिर कचरे के ढेर तक पहुंची दवाइयों की पूरी कहानी खंगालकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी करता है।
BPM प्रकरण की चर्चा के बीच सामने आया सेमरदर्री का यह मामला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। सवाल अब सिर्फ दवाइयों के कचरे का नहीं, बल्कि पूरे विभागीय सिस्टम की जवाबदेही का है।















