
फर्जी डिग्री के सहारे झोलाछाप इलाज? नोटिस और शपथपत्र के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रैक्टिस जारी होने का आरोप
जीशान अंसारी की रिपोर्ट

कोटा/बिलासपुर।कोटा विकासखंड के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की लगातार कार्रवाई के बीच अब रामकुमार प्रजापति को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस और कार्रवाई के बाद भी संबंधित व्यक्ति क्षेत्र में घूम-घूमकर मरीजों का इलाज कर रहा है।


शिकायतकर्ताओं के अनुसार, रामकुमार प्रजापति के पास Alternative Medicine का पार्ट टाइम प्रमाणपत्र होने की बात सामने आई है। साथ ही उसकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उसने कक्षा 12वीं तक पढ़ाई की है और उसमें कृषि विषय था। हालांकि, किसी व्यक्ति के चिकित्सा अभ्यास की वैधता केवल उसकी 12वीं की विषय-वस्तु से तय नहीं होती; इसके लिए संबंधित चिकित्सा पद्धति की मान्य योग्यता और वैध पंजीयन की जांच आवश्यक है। आधुनिक चिकित्सा के अभ्यास के लिए पंजीयन आवश्यक होने की बात है।
*Alternative Medicine प्रमाणपत्र की भी होगी जांच*

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि संबंधित व्यक्ति के पास केवल किसी निजी संस्था का वैकल्पिक चिकित्सा प्रमाणपत्र है, तो क्या वह उसके आधार पर एलोपैथिक दवाओं, इंजेक्शन अथवा अन्य आधुनिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का इलाज कर सकता है?
कानून में चिकित्सा पद्धतियों के दायरे और पंजीयन का महत्व स्पष्ट है। सुप्रीम कोर्ट ने Poonam Verma बनाम Ashwin Patel (1996) मामले में कहा था कि किसी एक चिकित्सा पद्धति में पंजीकृत व्यक्ति दूसरी पद्धति में बिना आवश्यक योग्यता के प्रैक्टिस नहीं कर सकता।
वहीं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के लिए भी मान्यता प्राप्त शिक्षा और पंजीयन व्यवस्था है। NCISM राष्ट्रीय स्तर पर Ayurveda, Unani, Siddha और Sowa-Rigpa के चिकित्सकों का रजिस्टर बनाए रखने की व्यवस्था करता है।
इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि रामकुमार प्रजापति के प्रमाणपत्र की संस्था, पाठ्यक्रम, मान्यता, पंजीयन और वह किन दवाओं एवं चिकित्सा पद्धति में इलाज करने के लिए अधिकृत है—इसकी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
*BMO से सांठगांठ के भी आरोप*
मामले में ग्रामीणों द्वारा BMO कोटा से कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पूर्व में जब ग्रामीणों ने फील्ड में इलाज करते हुए संबंधित व्यक्ति का वीडियो स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराया था, तब कार्रवाई करने के बजाय वीडियो संबंधित व्यक्ति तक पहुंच जाने की बात सामने आई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह भी जांच का विषय है कि शिकायत से संबंधित वीडियो किसके माध्यम से संबंधित व्यक्ति तक पहुंचा और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी ने शिकायतकर्ता अथवा जांच से जुड़ी जानकारी अनधिकृत रूप से साझा की।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष टेंगनमाड़ा क्षेत्र में बच्चों की मौत से जुड़े मामलों के दौरान भी कथित झोलाछाप चिकित्सकों पर कार्रवाई और उन्हें संरक्षण दिए जाने को लेकर सवाल उठे थे। अब एक बार फिर वही सवाल उठ रहे हैं कि यदि स्वास्थ्य विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है, तो नोटिस और शपथपत्र के बाद भी कथित रूप से इलाज कैसे जारी है?
आदिवासी क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौती*
रामकुमार प्रजापति के बारे में शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वह टाटीधार, मोहली, आमागोहन, खोंगसरा, तुलुफ, नवागांव सहित आसपास के आश्रित गांवों में मरीजों तक पहुंचता है।
इन क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्टाफ की कमी पहले से ही ग्रामीणों की चिंता का विषय रही है। ऐसे में लोग आसानी से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध व्यक्तियों से उपचार कराने लगते हैं।वर्तमान समय में क्षेत्र में मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना उचित जांच और योग्य चिकित्सक की सलाह के इलाज किया जाता है तो मरीजों के लिए स्थिति गंभीर हो सकती है।
अब स्वतंत्र जांच की मांग ग्रामीणों और *शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि:
रामकुमार प्रजापति की योग्यता एवं सभी प्रमाणपत्रों की सत्यता और मान्यता की जांच हो। उसका संबंधित चिकित्सा परिषद/रजिस्टर में पंजीयन सत्यापित किया जाए। वह किन दवाओं और चिकित्सा पद्धति से इलाज कर रहा है, इसकी जांच हो।पूर्व में जारी नोटिस और लिए गए शपथपत्र के बावजूद प्रैक्टिस जारी है या नहीं, इसका फील्ड सत्यापन कराया जाए।
BMO कार्यालय से कथित सांठगांठ के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा संरक्षण अथवा जांच से संबंधित गोपनीय जानकारी साझा करने की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप प्रैक्टिशनरों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है, तो क्या केवल नोटिस और शपथपत्र से मामला खत्म होगा या वास्तव में योग्यता, पंजीयन और मरीजों के उपचार की पूरी जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी?















