
“हाई कोर्ट के नाम पर पदोन्नति घोटाला?” मुंगेली में जेडी का बड़ा एक्शन, अब बिलासपुर डीईओ ऑफिस पर संकट….!
बिलासपुर, 29 मई 2026। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में वर्षों से दबे “पदोन्नति खेला” की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। मुंगेली जिले में हाई कोर्ट के आदेश की कथित गलत व्याख्या कर सहायक शिक्षकों को प्रधान पाठक बनाने का मामला अब विभागीय विवाद से निकलकर बड़े प्रशासनिक सवाल में बदल गया है। संयुक्त संचालक (जेडी) बिलासपुर ने जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली द्वारा जारी पदोन्नति आदेश को निरस्त कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर खड़ा हो गया है, जहां कथित तौर पर इससे भी बड़ा खेल होने के आरोप लग रहे हैं। जेडी बिलासपुर द्वारा जारी आदेश ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि डीपीआई के निर्देश पर पूरे मामले का परीक्षण किया गया और पाया गया कि हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर नियमों के विपरीत पदोन्नति दे दी गई थी। इसके बाद मुंगेली डीईओ द्वारा जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।

कोर्ट ने “विचार” कहा था, डीईओ ने बना दिया हेडमास्टर….!
पूरा मामला उन 9 सहायक शिक्षकों से जुड़ा है जिन्हें प्रधान पाठक प्राथमिक शाला के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था। बताया गया कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर के 31 जनवरी 2026 के आदेश के पालन में यह कार्रवाई की गई। लेकिन जब जेडी कार्यालय ने आदेश का परीक्षण किया तो पूरी कहानी बदल गई। कोर्ट ने अपने आदेश में केवल इतना कहा था कि सक्षम अधिकारी याचिकाकर्ताओं के प्रकरण पर नियमों के अनुरूप विचार करें और निराकरण करें। यानी कोर्ट ने सीधे पदोन्नति देने का कोई आदेश नहीं दिया था।इसके बावजूद मुंगेली डीईओ कार्यालय ने ऐसा आदेश निकाल दिया मानो कोर्ट ने सीधे पदोन्नति देने का निर्देश दे दिया हो। यही वजह है कि अब विभागीय गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह सिर्फ “गलत व्याख्या” थी या फिर सुनियोजित तरीके से नियमों को मोड़कर लाभ पहुंचाने की कोशिश?

जेडी के आदेश ने खोली पोल….!
जेडी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में साफ उल्लेख किया गया है कि परीक्षण के दौरान पाया गया कि संबंधित पदोन्नति शासन के निर्देशों के विपरीत है। इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली द्वारा जारी पदोन्नति आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।यानी विभाग ने अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार कर लिया कि हाई कोर्ट के आदेश की आड़ में नियमों को दरकिनार किया गया। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि आदेश गलत था तो सिर्फ आदेश निरस्त कर देना काफी है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?

अब बिलासपुर डीईओ कार्यालय पर उठे सबसे बड़े सवाल..!
मुंगेली में कार्रवाई के बाद अब पूरा फोकस बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर आ गया है। आरोप है कि यहां भी हाई कोर्ट के आदेशों और विभागीय नियमों की कथित गलत व्याख्या कर पदोन्नति का बड़ा खेल खेला गया। सूत्रों के मुताबिक जिन शिक्षकों के अभ्यावेदन को डीपीआई पहले ही खारिज कर चुका था, उन्हीं शिक्षकों को बाद में हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर पदोन्नति दे दी गई। यानी जिन्हें नियमों के तहत अयोग्य माना गया था, वे अचानक “योग्य” कैसे हो गए — यही सवाल अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है।
“निरस्त पदोन्नति” वाले भी बन गए हेडमास्टर…!
मामला यहीं नहीं रुकता। बिलासपुर डीईओ कार्यालय पर यह भी आरोप है कि लगभग 10 ऐसे शिक्षकों को भी हेडमास्टर बना दिया गया जिनकी पदोन्नति दो वर्ष पहले ही निरस्त हो चुकी थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर, कमिश्नर, जेडी और उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अब तक न किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ही कथित रूप से लाभ लेने वालों पर कोई गाज गिरी। यही वजह है कि अब शिक्षा विभाग के भीतर यह चर्चा खुलकर होने लगी है कि क्या नियम सिर्फ चुनिंदा जिलों के लिए हैं? मुंगेली में आदेश निरस्त हो सकता है तो बिलासपुर में कार्रवाई क्यों नहीं?
शिक्षा विभाग में “सेटिंग सिस्टम” की चर्चा तेज…!
इस पूरे मामले के बाद विभागीय कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच “सेटिंग सिस्टम” की चर्चा फिर तेज हो गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया अब पारदर्शिता से ज्यादा पहुंच, दबाव और संरक्षण का खेल बनती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि नियमों के खिलाफ पदोन्नति दी गई है तो केवल आदेश रद्द करना काफी नहीं होगा। जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और यदि जानबूझकर गलत आदेश जारी किए गए हैं तो कड़ी विभागीय कार्रवाई भी होनी चाहिए।
बड़ा सवाल — क्या बिलासपुर में भी चलेगी जेडी की “कैंची”?
मुंगेली मामले में जेडी बिलासपुर की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि विभाग चाहे तो गलत पदोन्नति आदेशों को पलट सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिलासपुर डीईओ कार्यालय में हुए कथित पदोन्नति खेल पर भी वैसी ही कार्रवाई होगी?
क्या डीपीआई अब बिलासपुर के उन आदेशों की भी जांच करेगा जिन पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं? क्या गलत पदोन्नति देने वाले अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय होगी? या फिर मामला कुछ दिनों की चर्चा बनकर फाइलों में दब जाएगा? फिलहाल इतना तय है कि मुंगेली में चली विभागीय “कैंची” ने शिक्षा विभाग की अंदरूनी व्यवस्था को बेनकाब कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मामला बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद बन सकता है।















