कानून को ठेंगा दिखाकर कराई नाबालिग की शादी, समझाइश के बाद भी नहीं माने परिजन; माता-पिता समेत पूरे गिरोह पर एफआईआर”

“कानून को ठेंगा दिखाकर कराई नाबालिग की शादी, समझाइश के बाद भी नहीं माने परिजन; माता-पिता समेत पूरे गिरोह पर एफआईआर”
बाल विवाह रोकने पहुंची टीम से शपथ पत्र भरवाने के बावजूद रचाई शादी, अब पुरोहित, बराती और आयोजन में शामिल अन्य लोगों पर भी कानूनी शिकंजा।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए नाबालिग बालक का विवाह कराने वाले परिजनों एवं इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया है। यह कार्रवाई जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के अभियान के तहत की गई है।
अमित सिन्हा, महिला एवं बाल विकास अधिकारी

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पिपरिया में एक नाबालिग बालक के विवाह की सूचना जिला महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला बाल संरक्षण इकाई को मिली थी। सूचना मिलते ही विभाग की टीम, सुपरवाइजर, बाल संरक्षण अधिकारियों और ग्राम पंचायत बाल संरक्षण समिति के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर बालक के पिता भारत सिंह एवं माता कलेशिया को समझाइश दी थी।


इतना ही नहीं, परिजनों से लिखित शपथ पत्र भी भरवाया गया था कि वे बाल विवाह नहीं करेंगे। साथ ही उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यदि बाल विवाह कराया गया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।लेकिन प्रशासन की चेतावनी और शपथ पत्र के बावजूद परिजनों ने कानून की अनदेखी करते हुए नाबालिग बालक का विवाह संपन्न करा दिया। दोबारा सूचना मिलने पर जिला बाल संरक्षण इकाई की जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की, जिसमें बाल विवाह होने की पुष्टि हुई।जांच रिपोर्ट जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपे जाने के बाद गौरेला थाने में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 9, 10 एवं 11 के तहत माता-पिता और अन्य संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कराया गया है।
महिला एवं बाल विकास अधिकारी अमित सिन्हा ने कहा कि जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। बाल विवाह की सूचना मिलने पर सबसे पहले संबंधित परिवारों को समझाइश दी जाती है और कानून के प्रावधानों की जानकारी दी जाती है। पिपरिया मामले में भी परिजनों से शपथ पत्र भरवाया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने नाबालिग का विवाह करा दिया। जांच में बाल विवाह की पुष्टि होने पर नियमानुसार संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाल विवाह एक गंभीर एवं संज्ञेय अपराध है। इसमें केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि विवाह संपन्न कराने वाला पुरोहित, टेंट संचालक, हलवाई, डीजे संचालक, बराती और आयोजन में सहयोग करने वाला हर व्यक्ति कानूनी रूप से दोषी माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों को दो वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का अभियान जारी
महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा जिले में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में बाल संरक्षण समितियों का गठन किया गया है तथा पंचायत सचिवों और आंगनबाड़ी सुपरवाइजरों को बाल विवाह निषेध अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूचना मिलने पर पहले समझाइश और आवश्यक हस्तक्षेप किया जाता है, लेकिन कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
महिला एवं बाल विकास अधिकारी अमित सिन्हा ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 या डायल 112 पर सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।गौरेला-पेंड्रा-मरवाही प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि कानून तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।















