
गरीब बेटियों के सम्मान से खिलवाड़! ‘सोने’ की जगह गिलेट मंगलसूत्र कांड में अधिकारी दंडित, अब सप्लायर और पूरे सिंडिकेट पर कार्रवाई कब?
दो वेतनवृद्धि रोकी गई, सेवा पुस्तिका में दर्ज होगी सजा… लेकिन करोड़ों की खरीद और दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई का सवाल अब भी कायम।

रायपुर/मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में कथित तौर पर नवविवाहिताओं को सोने के स्थान पर गिलेट धातु के मंगलसूत्र वितरित किए जाने का मामला अब शासन की कार्रवाई के बाद और गंभीर हो गया है। लंबे समय से उठ रहे सवालों और निष्पक्ष जांच की मांग के बीच महिला एवं बाल विकास विभाग ने तत्कालीन जिला कार्यक्रम अधिकारी आदित्य शर्मा की दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का आदेश जारी किया है। साथ ही इस दंड की प्रविष्टि उनकी सेवा पुस्तिका में दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गड़बड़ी साबित हो चुकी है, तो कार्रवाई केवल विभागीय दंड तक ही सीमित क्यों रखी गई ? मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मानपूर्वक वैवाहिक जीवन की शुरुआत कराना है। ऐसे में यदि लाभार्थियों को निर्धारित गुणवत्ता के बजाय कथित रूप से गिलेट धातु के मंगलसूत्र दिए गए, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि गरीब बेटियों के सम्मान के साथ गंभीर विश्वासघात भी है।

अब कई अहम सवाल शासन और विभाग के सामने खड़े हैं। घटिया सामग्री की खरीद किस एजेंसी या सप्लायर से हुई? खरीद प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी? सरकारी धन के दुरुपयोग की आर्थिक भरपाई कौन करेगा? और क्या इस पूरे मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी?
यह मामला एक अधिकारी के दंड से कहीं बड़ा है। यदि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की मिलीभगत या भ्रष्टाचार हुआ है, तो पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। केवल वेतनवृद्धि रोक देने से जनता के मन में उठ रहे सवाल समाप्त नहीं होंगे।

लोकतंत्र में मीडिया की जिम्मेदारी तथ्यों के आधार पर जनता के हित से जुड़े मुद्दों को सामने लाना है। इस मामले में लगातार उठाए गए सवालों के बाद शासन की कार्रवाई यह साबित करती है कि जवाबदेही तय करना संभव है। अब जनता की नजर इस बात पर है कि क्या जांच सप्लायर, खरीद समिति और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचेगी या मामला सिर्फ एक विभागीय दंड तक सीमित रह जाएगा।
गरीब बेटियों के सम्मान से समझौता करने वालों के खिलाफ केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि कठोर आर्थिक और आपराधिक जवाबदेही तय होना ही वास्तविक न्याय होगा।















