
खबरों का राजा न्यूज़ का बड़ा असर: समाचार प्रकाशित होने के बाद नाबालिग छात्रा के मामले में बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान
मुसियारी स्कूल में छात्रा से कथित मारपीट का मामला पहुंचा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक

डीईओ बिलासपुर को विस्तृत जांच के निर्देश, 22 अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश
जीशान अंसारी की कलम से, बिलासपुर/कोटा। कोटा विकासखंड के वनांचल क्षेत्र स्थित प्राथमिक शाला मुसियारी में कक्षा 3 की नाबालिग छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा कथित मारपीट और शारीरिक दंड दिए जाने के मामले में खबरों का राजा न्यूज़ द्वारा समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है।


आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर को पत्र जारी कर घटना की विस्तृत जांच करने और जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग के पत्र में जांच रिपोर्ट 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे तक आयोग कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

व्हाट्सऐप शिकायत और तस्वीरों के आधार पर आयोग ने लिया संज्ञान
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि व्हाट्सऐप के माध्यम से प्राप्त शिकायत एवं तस्वीरों के आधार पर प्राथमिक शाला मुसियारी में नाबालिग छात्रा के साथ कथित मारपीट एवं शारीरिक दंड दिए जाने की जानकारी आयोग के संज्ञान में आई।
शिकायत में विद्यालयीन समय में शिक्षक द्वारा शराब सेवन किए जाने का आरोप भी बताया गया है। इन सभी बिंदुओं की जांच करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी को दिए गए हैं।
बच्ची के स्वास्थ्य की जानकारी भी मांगी
आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(ज) एवं 14 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उल्लेख करते हुए पीड़ित बच्ची के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी तथा घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि जांच के दौरान लगाए गए आरोप सत्य पाए जाते हैं तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
क्या है पूरा मामला?
पालक की शिकायत के अनुसार, प्राथमिक शाला मुसियारी में कक्षा 3 की एक नाबालिग छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा कथित रूप से मारपीट की गई थी। पालक ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने बच्ची का कान पकड़कर ऊपर उठाया और ऐंठा, जिससे कान में चोट लगने तथा खून निकलने की बात सामने आई।
शिकायत के साथ घटना से संबंधित तस्वीरें भी उपलब्ध कराए जाने की बात आयोग के पत्र में दर्ज है।
पालक ने यह भी आरोप लगाया था कि इससे पहले भी बच्ची के साथ मारपीट की घटना हुई थी। वहीं, शिक्षक से बातचीत के दौरान बच्ची को सजा देने की बात स्वीकार किए जाने का दावा भी शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है।
शिकायतकर्ता को भी भेजी गई आयोग के पत्र की प्रति
आयोग द्वारा जारी पत्र की प्रति आवेदक प्रदीप शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार, जिला बिलासपुर को भी सूचनार्थ भेजी गई है। इससे मामले में आयोग स्तर पर औपचारिक कार्रवाई शुरू होने की पुष्टि होती है।
अब शिक्षा विभाग की जांच पर नजर
आयोग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को निर्धारित समय-सीमा में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब शिक्षा विभाग की जांच और रिपोर्ट पर नजर रहेगी।
जांच में बच्ची के स्वास्थ्य, घटना की परिस्थितियों, शिक्षक के कथित व्यवहार तथा शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की वास्तविकता सामने आने की उम्मीद है।
फिलहाल आयोग के पत्र में सभी आरोपों को जांच का विषय माना गया है। आरोपों की सत्यता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
नाबालिग बच्ची की पहचान बाल संरक्षण की दृष्टि से सार्वजनिक नहीं की जा रही है।















