
जीपीएम DMF में बिना अनुमोदन स्वीकृत 63 कार्य निरस्त! कलेक्टर का तीनों जनपद CEO को सख्त फरमान, जारी राशि तत्काल वापस जमा कराने का आदेश
₹17.47 करोड़ के 160 कार्यों की स्वीकृति पर उठे सवालों के बीच प्रशासन का बड़ा एक्शन, 29 अक्टूबर को गौरेला, मरवाही और पेंड्रा CEO को जारी हुआ निरस्तीकरण आदेश

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) में नियमों को दरकिनार कर स्वीकृत किए गए विकास कार्यों पर आखिरकार जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बिना प्रबंधकारिणी समिति एवं शासी परिषद के अनुमोदन के वर्ष 2026-27 में स्वीकृत किए गए 63 कार्यों को निरस्त करने का आदेश जिला कलेक्टर द्वारा 29 अक्टूबर 2026 को जिले के तीनों जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को जारी किया गया है। आदेश के बाद DMF की स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।जारी निरस्तीकरण आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि DMF के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में स्वीकृत कार्यों को प्रबंधकारिणी समिति एवं शासी परिषद के अनुमोदन के बिना स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित प्रबंधकारिणी समिति की बैठक में अनुमोदन प्राप्त होने के पश्चात उक्त कार्यों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया। तीनों जनपदों में 63 कार्यों पर चला निरस्तीकरण का आदेश कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत जिले के तीनों विकासखंडों में स्वीकृत कार्यों को निरस्त किया गया है।
जनपद पंचायत गौरेला – 37 कार्य,जनपद पंचायत मरवाही – 21 कार्य जनपद पंचायत पेंड्रा – 5 कार्य कुल 63 कार्यों को निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए तीनों जनपद पंचायतों के CEO को अलग-अलग आदेश जारी कर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

# जारी राशि तत्काल वापस जमा कराने का आदेश
कलेक्टर के आदेश में केवल कार्यों को निरस्त करने की बात नहीं है, बल्कि जिन कार्यों के लिए राशि जारी की जा चुकी है, उस राशि को तत्काल जिला खनिज संस्थान न्यास के SBI पेंड्रा रोड स्थित खाते में जमा कराने का निर्देश भी दिया गया है। साथ ही राशि जमा कराने के बाद संबंधित कार्यालय को सूचित करना अनिवार्य किया गया है।

## बिना समिति की मंजूरी करोड़ों की स्वीकृति किसके इशारे पर?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब DMF की प्रबंधकारिणी समिति और शासी परिषद का अनुमोदन आवश्यक था, तो फिर इनके अनुमोदन के बिना कार्यों को स्वीकृति कैसे दे दी गई? किस अधिकारी ने फाइलों को मंजूरी दी? किसके निर्देश पर राशि जारी हुई? और इस पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी थी?
गौरतलब है कि जिले में DMF के 160 कार्यों के लिए लगभग ₹17.47 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में 63 कार्यों का निरस्त होना DMF की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।
# अब सिर्फ निरस्तीकरण नहीं, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
सवाल यह है कि बिना निर्धारित अनुमोदन के कार्यों को स्वीकृति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी? पूरे मामले में स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की फाइलों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तय करना जरूरी है।
DMF का पैसा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए है, न कि नियमों को ताक पर रखकर स्वीकृतियां बांटने के लिए। आखिर इस पूरे सिंडिकेट का असली मास्टर माइंड कौन है….!















