
नगरीय निकायों के कर्मचारी संगठनों पर सरकार का बड़ा प्रहार! गैर-मान्यता प्राप्त संघों की नहीं सुनेगी सरकार, सीधे पत्र भेजा तो पदाधिकारियों सहित कर्मचारियों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज!
रायपुर,01अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के कर्मचारी संगठनों को लेकर राज्य शासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अब गैर-मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ अपनी मांगों और कर्मचारियों से जुड़े सेवा संबंधी मामलों को लेकर सीधे सरकार के दरवाजे पर दस्तक नहीं दे सकेंगे। शासन ने साफ कर दिया है कि बिना मान्यता वाले संगठनों की ओर से भेजे गए पत्रों और अभ्यावेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि इसके बावजूद ऐसे संगठन शासन को पत्र भेजते हैं, तो उनके पदाधिकारियों के साथ पत्राचार में शामिल कर्मचारियों पर भी सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।

नगरीय शासन एवं विकास विभाग के इस निर्देश ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में सक्रिय कर्मचारी संगठनों के बीच हलचल बढ़ा दी है। शासन ने पत्राचार की व्यवस्था को लेकर दो टूक संदेश दिया है कि अब संगठन के नाम पर सीधे शासन स्तर पर मांगें रखने की छूट नहीं होगी। इसके लिए संगठन का विधिवत मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य होगा।
गैर-मान्यता प्राप्त संघों के पत्र सीधे खारिज, शासन ने दिखाई सख्ती….!

विभाग के सामने यह बात आई है कि प्रदेश के कई नगरीय निकायों में ऐसे अधिकारी-कर्मचारी संघ सक्रिय हैं, जिन्हें राज्य शासन से विधिवत मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद ये संगठन विभिन्न मांगों, सेवा संबंधी समस्याओं और अन्य मुद्दों को लेकर लगातार शासन स्तर पर पत्राचार कर रहे हैं। शासन ने अब इस पर रोक लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि केवल विधिवत मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों के अभ्यावेदन और पत्रों पर ही विचार किया जाएगा। गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों के नाम से भेजे जाने वाले पत्रों को शासन स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सीधे सरकार को शिकायत भेजने का रास्ता बंद, निकाय प्रमुख के माध्यम से करना होगा आवेदन….?

कर्मचारियों की व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर भी शासन ने प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है। वेतन, पदोन्नति, सेवा शर्तों या अन्य व्यक्तिगत सेवा संबंधी मामलों में कर्मचारी सीधे शासन को पत्र नहीं भेज सकेंगे। उन्हें अपने संबंधित नगरीय निकाय के प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के तहत अभ्यावेदन देना होगा।
संघ के नाम पर पत्राचार किया तो पदाधिकारियों के साथ कर्मचारी भी नपेंगे!
शासन के निर्देश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गैर-मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों के नाम से शासन स्तर पर पत्राचार जारी रखने की स्थिति में संबंधित पदाधिकारियों के साथ इसमें संलग्न कर्मचारियों के विरुद्ध भी सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगम से नगर पंचायत तक लागू होगा फरमान….!
यह निर्देश प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी संगठनों पर लागू होगा। शासन के इस फैसले से अब कर्मचारी संगठनों के सामने मान्यता प्राप्त करने और निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अपनी मांगें रखने की चुनौती होगी। सवाल यह है कि कर्मचारी संगठनों की सामूहिक मांगों को लेकर अब तक चल रहे पत्राचार पर इस सख्ती का कितना असर पड़ेगा? फिलहाल शासन ने अपना रुख साफ कर दिया है—मान्यता प्राप्त संघ ही शासन स्तर पर सामूहिक मांगें रख सकेंगे और व्यक्तिगत शिकायतों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।















