
डाइट पेंड्रा के स्वयंसेवकों ने जरूरतमंद परिवारों के बीच बांटी दीपावली की खुशियां, खाद्य सामग्री वितरित वितरित किये


प्राचार्य नरेंद्र कुमार तिवारी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सेवा योजना का सराहनीय सेवा अभियान, ‘मैं नहीं, बल्कि आप’ के संदेश से दिया मानवता और सामाजिक सरोकार का परिचय
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 05 नवंबर 2026। दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और मिठाइयां बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस त्योहार की असली सार्थकता समाज के उन लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने में है, जो आर्थिक अभाव के कारण त्योहार की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। इसी मानवीय भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) पेंड्रा की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई के स्वयंसेवकों ने जरूरतमंद एवं वंचित परिवारों के बीच पहुंचकर दीपावली की खुशियां साझा कीं। स्वयंसेवकों ने परिवारों को दैनिक उपयोग एवं खाद्य सामग्री वितरित कर उनके जीवन में खुशियों का उजाला फैलाने की सराहनीय पहल की।


अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यालय के निर्देशानुसार आयोजित इस सेवा अभियान का नेतृत्व डाइट पेंड्रा के प्राचार्य नरेंद्र कुमार तिवारी ने किया। कार्यक्रम अधिकारी विकास कुमार वर्मा एवं सहायक प्राध्यापक जे.पी. पैकरा के मार्गदर्शन में संस्थान के अधिकारी-कर्मचारियों और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने अभियान में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

इस दौरान जरूरतमंद परिवारों को दीपावली के अवसर पर खाद्य समाग्री, मिठाई, लाई, दीया, तेल, बाती, अगरबत्ती, नारियल, बिस्किट एवं चॉकलेट सहित दैनिक उपयोग और खाद्य सामग्री वितरित की गई। सामग्री प्राप्त कर जरूरतमंद परिवारों के चेहरों पर खुशी और संतोष दिखाई दिया। इस पहल के माध्यम से स्वयंसेवकों ने यह संदेश दिया कि त्योहार की खुशियां तभी सार्थक होती हैं, जब समाज का हर वर्ग उसमें सहभागी बने और कोई भी परिवार खुद को अकेला या उपेक्षित महसूस न करे।
प्राचार्य नरेंद्र कुमार तिवारी, ने कहा कि जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियां बांटना केवल सेवा कार्य नहीं, बल्कि हमारा सामाजिक और नैतिक उत्तरदायित्व भी है। दीपावली जैसे पावन पर्व पर समाज के वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बीच पहुंचकर उनके साथ खुशियां साझा करना बेहद संतोष और आत्मीयता का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं में मानवीय संवेदना, सहयोग, सेवा भावना तथा सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना भी आवश्यक है। राष्ट्रीय सेवा योजना के माध्यम से स्वयंसेवकों को समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस पुनीत कार्य में सहभागी बने सभी अधिकारी-कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के जनसेवा और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
वहीं कार्यक्रम अधिकारी विकास कुमार वर्मा ने राष्ट्रीय सेवा योजना के मूल मंत्र ‘मैं नहीं, बल्कि आप’ को रेखांकित करते हुए कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर दूसरों की जरूरतों और खुशियों का ध्यान रखना है। उन्होंने स्वयंसेवकों को समाज के जरूरतमंद लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनने, उनके प्रति संवेदनशील रहने तथा सामाजिक दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का संदेश दिया।
इस सेवा अभियान ने एक बार फिर यह साबित किया कि छोटी-सी पहल भी किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी खुशी का कारण बन सकती है। डाइट पेंड्रा की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की इस पहल को शिक्षा के साथ संस्कार, संवेदना और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देने वाला प्रेरणादायी प्रयास माना जा रहा है। अभियान में संस्थान के अधिकारी-कर्मचारियों एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता रही।















