तख़तपुर में शिक्षा विभाग की लापरवाही— सरकारी स्कूल में बच्चों से कराए बिजली का काम”

बिलासपुर/तख़तपुर — सरकारी स्कूल में बच्चों से कराए गए हाई वोल्टेज ट्रांसफार्मर का काम, बिना सेफ़्टी गियर के— प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर, दोषियों पर तात्कालिक कार्रवाई की मांग
शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूल में बच्चों की किताब-कॉपी की जगह अब करंट वाला ‘प्रैक्टिकल’! बिलासपुर ज़िले के तख़तपुर ब्लॉक स्थित सरकारी हाई स्कूल चनाडोंगरी में ट्रांसफार्मर इंस्टॉलेशन के दौरान ठेकेदार और बिजली विभाग की टीम ने बच्चों को ही रस्सी खींचने, तार खींचने और अन्य सहायक कार्यों में लगा दिया।
खतरनाक लापरवाही:
बच्चे स्कूल यूनिफ़ॉर्म में ही हाई वोल्टेज तार और उपकरण के पास काम करते दिखे।
न तो हेलमेट, न ग्लव्स, न सेफ़्टी बेल्ट— कोई सुरक्षा इंतज़ाम मौजूद नहीं था।
जगह पर न चेतावनी बोर्ड, न बैरियर— मानो बच्चों की जान जोखिम में डालना सामान्य हो।
कानून का खुला उल्लंघन:
यह कृत्य विद्युत अधिनियम 2003, बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, और बच्चों के मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन है। बिजली सुरक्षा नियमों के तहत, हाई वोल्टेज क्षेत्र में केवल प्रशिक्षित व प्रमाणित व्यक्ति को ही काम करने की अनुमति है।
ग्रामीणों में ग़ुस्सा:
अभिभावकों ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा—
> “हम बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं, न कि मौत के मुंह में धकेलने के लिए। दोषियों को तुरंत सज़ा मिलनी चाहिए।”
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए ज़िला प्रशासन, बिजली विभाग और शिक्षा विभाग के खिलाफ तात्कालिक कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक सवाल:
स्कूल प्रशासन ने ठेकेदार को बच्चों से काम कराने की अनुमति क्यों दी…?
बिजली विभाग ने सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं करवाया?
इंस्टॉलेशन के दौरान बच्चों को स्कूल परिसर से हटाया क्यों नहीं गया?
तत्काल कार्रवाई की मांग:
1. मामले की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो।
2. संबंधित ठेकेदार का लाइसेंस रद्द कर कानूनी कार्रवाई हो।
3. दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाए।
4. बच्चों की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
यह मामला बच्चों की जान से खिलवाड़ और शिक्षा प्रणाली पर कलंक है। अगर प्रशासन आज ही सख़्त कदम नहीं उठाता, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है।





