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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: “छात्राओं से बैड-टच करने वाला शिक्षक सिर्फ गुनहगार नहीं, समाज के लिए खतरा”  “गुरु के नाम पर कलंक”: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:

छात्राओं से बैड-टच करने वाला शिक्षक सिर्फ गुनहगार नहीं, समाज के लिए खतरा”

 “गुरु के नाम पर कलंक”: हाईकोर्ट

बिलासपुर:- हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक की अपील खारिज करते हुए दो टूक कहा है कि शिक्षक का पद सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का पद है। नाबालिग छात्राओं से बैड-टच, अभद्र टिप्पणी या यौन शोषण जैसी हरकतें किसी भी हालत में व्यावसायिक कदाचार नहीं मानी जा सकतीं। यह गंभीर आपराधिक अपराध है, जिसके लिए कड़ी सजा मिलना जरूरी है।

  “गुरु के नाम पर कलंक”: हाईकोर्ट

यह मामला बरेला शासकीय स्कूल का है, जहां गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए नियुक्त कीर्ति कुमार शर्मा ने अपने कर्तव्य की सीमाएं लांघीं। वह बिना अनुमति विज्ञान पढ़ाने कक्षा में घुसता और इसी दौरान छात्राओं से गंदी हरकतें करता। पीड़िताओं ने शिकायत की कि वह क्लास में बैड-टच करता, रीढ़ और छाती तक हाथ लगाता और अपमानजनक बातें कहता।

  जांच में निकला सच

डीईओ की जांच में न केवल छात्राओं की गवाही सामने आई बल्कि अन्य शिक्षकों के बयान ने भी आरोप पुख्ता किए। आरोपी के स्कूल में गुटखा और गुड़ाखू खाने की आदतों ने उसकी छवि और भी बिगाड़ी।

  जेल भेजा गया, मिली सजा

आरोप सिद्ध होने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। फास्ट-ट्रैक पाक्सो कोर्ट ने मार्च 2022 में उसे दो साल दो महीने छह दिन की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई।

 हाईकोर्ट ने तोड़ी उम्मीदें

आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करते हुए खुद को षड्यंत्र का शिकार बताया, लेकिन हाईकोर्ट ने उसकी सारी दलीलें ठुकरा दीं। अदालत ने साफ कहा कि पीड़िताओं की गवाही भरोसेमंद है और आरोपी को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।

 “ऐसे शिक्षक को कोई दया नहीं”

हाईकोर्ट ने यह संदेश दिया कि जो शिक्षक मासूम छात्राओं की गरिमा और सुरक्षा से खिलवाड़ करते हैं, वे सिर्फ स्कूल ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा हैं। ऐसे गुनहगारों पर दया नहीं, सख्त सजा ही एकमात्र रास्ता है।

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