Gaurella pendra Marwahi : अतिरिक्त कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम अवहेलना, कार्यालय पेंड्रा रोड SDM के कर्मचारी कर रहे मनमानी,,,

SDM कार्यालय में बैठा बाबू अशोक उदासीन,,,,जब उच्च अधिकारी के आदेश का ही पालन नहीं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है,,,,SDM बदले लेकिन कर्मचारियों का उदासीन रवैया नहीं,,
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा उदाहरण सामने आया है जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लगाए गए एक मामले में अतिरिक्त कलेक्टर एवं प्रथम अपीलिय अधिकारी ने दिनांक 06 अगस्त 2025 को स्पष्ट आदेश पारित किया था। आदेश में कहा गया था कि संबंधित जनसूचना अधिकारी (अनुविभागीय अधिकारी, पेंड्रा रोड) एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत कर आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराएँ। लेकिन आदेश जारी हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका है। इसके बावजूद न तो रिपोर्ट पेश की गई और न ही आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराई गई। आवेदक जब-जब SDM कार्यालय पेंड्रा रोड पहुँचता है, वहाँ बैठे कर्मचारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “अतिरिक्त कलेक्टर से आदेश की प्रति यहाँ पहुँची ही नहीं है।”
आदेश 06 अगस्त को जारी, फिर भी बहानेबाजी
आदेश की प्रमाणित प्रति 06/08/2025 को ही जारी कर संबंधित कार्यालय को भेज दी गई थी। इसके बाद भी SDM कार्यालय के कर्मचारी लगातार टालमटोल कर रहे हैं। इससे साफ है कि या तो आदेश को जानबूझकर दबा दिया गया है या फिर अधिकारी-कर्मचारी खुलेआम अतिरिक्त कलेक्टर एवं प्रथम अपीलिय अधिकारी के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
आम जनता का विश्वास डगमगाया
यह स्थिति न केवल शासन के आदेशों की अवहेलना है बल्कि आम जनता के साथ अन्याय भी है। यदि एक अतिरिक्त कलेक्टर के आदेश का पालन कराने की ताकत SDM कार्यालय में नहीं है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह घटना जनता के विश्वास को डगमगा देने वाली है।
कार्रवाई की मांग
सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 में स्पष्ट प्रावधान है कि आदेश की अवहेलना करने वाले जनसूचना अधिकारी पर ₹250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके बावजूद अब तक दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। आवेदक ने मांग की है कि आदेश की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जा सके।





