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“कोचिंग के बिना 96% अंक हासिल कर पेंड्रा की यशिता मोटवानी ने बढ़ाया जिले का गौरव, मेहनत और आत्मविश्वास बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत”

कोचिंग के बिना 96% अंक हासिल कर पेंड्रा की यशिता मोटवानी ने बढ़ाया जिले का गौरव, मेहनत और आत्मविश्वास बनी सफलता की सबसे बड़ी ताकत”

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। आज के दौर में जहां बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक लाने के लिए छात्र बड़े-बड़े कोचिंग संस्थानों और महंगी ट्यूशन पर निर्भर हो चुके हैं, वहीं पेंड्रा की बेटी यशिता मोटवानी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर यह साबित कर दिया कि सफलता किसी शॉर्टकट की मोहताज नहीं होती। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं परीक्षा में यशिता ने शानदार 96 प्रतिशत अंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का गौरव भी बढ़ाया है।

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यशिता, माँ कल्याणिका पब्लिक स्कूल गौरेला की छात्रा रही हैं। जैसे ही परिणाम घोषित हुआ, स्कूल परिसर से लेकर पेंड्रा शहर तक खुशी और गर्व का माहौल बन गया। शिक्षकों, रिश्तेदारों और परिचितों ने यशिता को फोन और संदेशों के माध्यम से लगातार शुभकामनाएं दीं। जिले में उनकी सफलता चर्चा का विषय बनी हुई है।

सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि यशिता ने किसी भी प्रकार की बाहरी ट्यूशन या कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने पूरी तैयारी स्वअध्ययन के माध्यम से की। नियमित पढ़ाई, समय प्रबंधन और विषयों की गहराई से समझ के आधार पर उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की। आज जब अधिकांश विद्यार्थी सफलता के लिए कोचिंग को अनिवार्य मानते हैं, ऐसे समय में यशिता की सफलता हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

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यशिता की इस शानदार उपलब्धि पर जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं उनके पेंड्रा स्थित निवास पहुंचे और उन्हें बुके भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने मिठाई खिलाकर यशिता को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि जिले के विद्यार्थी लगातार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और यशिता की उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि विद्यार्थी लक्ष्य के प्रति गंभीर हों तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

इस अवसर पर आलोक शुक्ला और संतोष सोनी भी मौजूद रहे। सभी ने यशिता की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए कहा कि जिले की बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रही हैं और यह पूरे समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।

यशिता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और नियमित अध्ययन को दिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया और समय बर्बाद करने वाली गतिविधियों से दूरी बनाई। हर विषय को समझकर पढ़ना, नोट्स तैयार करना और निरंतर अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। उन्होंने

पार्ट 02 _____“एक तरफ टॉपर्स पर वाहवाही, दूसरी तरफ 5 वीं-8वीं के लेट रिजल्ट पर सवाल… क्या सिर्फ मीडिया बयानबाजी तक सीमित है शिक्षा विभाग

सबसे ज्यादा सवाल जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि विभागीय अव्यवस्थाओं और शैक्षणिक समस्याओं पर ठोस कार्रवाई की बजाय सिर्फ मीडिया में बयान देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है। जिले में यह चर्चा आम हो चुकी है कि शिक्षा विभाग अब जमीनी सुधार से ज्यादा “इमेज मैनेजमेंट” में व्यस्त दिखाई देता है।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि परीक्षा परिणाम समय पर जारी नहीं हो पा रहे हैं, तो यह सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं बल्कि विभागीय समन्वय और मॉनिटरिंग की बड़ी विफलता है। आखिर मूल्यांकन प्रक्रिया, डेटा अपडेट और रिजल्ट जारी करने की तैयारी पहले से क्यों नहीं की गई? यदि अन्य जिलों में परिणाम समय पर आ सकते हैं तो GPM जिला पीछे क्यों रह गया?

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