
लेनदेन कर बहाली और पोस्टिंग के आरोप में घिरे सेवानिवृत्त CCF प्रभात मिश्रा, रेंजर के वायरल ऑडियो से हुई पुष्टि,!
जीपीएम (खबरों का राजा): बिलासपुर वनवृत्त इन दिनों सुर्खियों में है। वजह है — पिछले माह सेवानिवृत्त हुए तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक (CCF) प्रभात मिश्रा पर लगे गंभीर लेनदेन और पद के दुरुपयोग के आरोप।
सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्ति से ठीक पहले मिश्रा द्वारा कई अधिकारियों-कर्मचारियों की बहाली और पोस्टिंग के आदेश जारी किए गए, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रेंजर का ऑडियो के अनुसार !
मामला तब और गर्म हो गया जब रेंजर मान सिंह स्याम का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
ऑडियो में कथित तौर पर मान सिंह स्याम यह स्वीकार करते सुने गए कि CCF प्रभात मिश्रा द्वारा बहाली और पोस्टिंग के बदले पैसों का लेनदेन हुआ था।
ऑडियो वायरल होने के बाद विभागीय कर्मचारियों और सोशल मीडिया समूहों में चर्चा का माहौल गरमा गया है।
मामला 1: रेंजर मनीष श्रीवास्तव की बहाली !
खोडरी परिक्षेत्र के प्रभारी रेंजर मनीष श्रीवास्तव पर गंभीर आरोप लगने के बाद उन्हें निलंबित किया गया था।
लेकिन सेवा निवृत्ति के कुछ दिन पहले ही, CCF प्रभात मिश्रा ने बिना जांच रिपोर्ट या आरोपपत्र के उन्हें बहाल कर दिया।
आरोप है कि यह बहाली 3 लाख रुपये के सौदे के बाद हुई।
वायरल ऑडियो के अनुसार, इस सौदे में रेंजर मान सिंह श्याम स्वयं 1.5 लाख रुपये देने की बात कही थी।
बताया जाता है कि सौदे के पाँच दिन के भीतर ही मान सिंह श्याम को मरवाही वनमंडल के उड़नदस्ता दल में पदस्थ कर दिया गया — जो विभाग में “आरामदायक और प्रभावशाली पोस्ट” मानी जाती है।
इसी क्रम में मड़ना के कास्टगार्ड अधिकारी की भी एडवांस पोस्टिंग कर दी गई, जिससे विभागीय कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।
मामला 2: वनकर्मी उदय तिवारी की बहाली !
इसी तरह, उदय तिवारी, परिक्षेत्र सहायक खोडरी, को अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किया गया था।
लेकिन सेवानिवृत्ति से मात्र एक दिन पहले, CCF प्रभात मिश्रा ने उन्हें भी बहाल कर उसी जगह पर दोबारा पदस्थ कर दिया — जहाँ से वे निलंबित हुए थे।
कर्मचारियों का कहना है कि यह आदेश नियमों की खुली अवहेलना और भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है।
विभाग में असंतोष और कार्रवाई की मांग इन आदेशों से बिलासपुर वनवृत्त और मरवाही वनमंडल दोनों में असंतोष और अविश्वास का माहौल है।
शासन से की मांग
1.सेवानिवृत्त CCF प्रभात मिश्रा द्वारा जारी सभी आदेश तत्काल निरस्त किए जाएँ।
2 पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
3.दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
सूत्रों के अनुसार, शासन स्तर पर इस मामले में जांच टीम गठित करने पर विचार किया जा रहा है।
हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विभाग की पर सवालियां निशान
स्पष्ट है कि यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि शासन इस विवादास्पद बहाली और लेनदेन प्रकरण पर सख्त कार्रवाई करता है या मामला फिर फाइलों में दब जाएगा।





