मरवाही तहसील में मामला लंबित, फिर भी मरवाही नगर पंचायत सीएमओ ने अतिक्रमण हटाने का जारी किया, नोटिस , मामला चौंकाने वाली…?

मरवाही तहसील में मामला लंबित, फिर भी मरवाही नगर पंचायत सीएमओ ने अतिक्रमण हटाने का जारी किया, नोटिस , मामला चौंकाने वाली…?
रायपुर/जीपीएम। तहसील मरवाही का चर्चित भूमि विवाद अब और तूल पकड़ चुका है। जिस प्रकरण की सुनवाई तहसील न्यायालय में जारी है, उसी बीच नगर पंचायत मरवाही द्वारा संबंधित पक्ष गिरधारीलाल पिता श्यामलाल सहित अन्य लोगों को बेदखली नोटिस जारी कर दिया गया। इस कार्रवाई ने तहसीलदार और नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोटिस का संदर्भ……

नगर पंचायत मरवाही ने 04 सितंबर 2025 को पत्र क्रमांक 760/2025-26 के तहत नोटिस जारी किया। इसमें उल्लेख है कि खसरा नंबर 368/1 (क्षेत्रफल 0.121 हेक्टेयर) शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर दुकान निर्माण किया गया है। नगर पंचायत ने कब्जा हटाने और जवाब तलब करने का आदेश दिया है।

कानूनी स्थिति……
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होता है, तब किसी भी अधिकारी को समानांतर कार्रवाई का अधिकार नहीं होता। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा जारी यह नोटिस न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जा सकता है।

CMO यादव का बड़ा खुलासा…….
नगर पंचायत मरवाही के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) श्री यादव ने चौंकाने वाला खुलासा किया।
“मुझे तहसीलदार प्रीतिशर्मा ने कार्यालय बुलाकर कहा कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी कीजिए। जब मैंने उनसे पूछा कि मामला तो न्यायालय में लंबित है, आदेश कैसे निकल सकता है..? तो उन्होंने साफ कहा – ‘कुछ नहीं होता, आप आदेश निकालो।’ दबाव की स्थिति में मुझे नोटिस जारी करना पड़ा।”
वहीं तहसीलदार प्रीतिशर्मा ने कहा कि “अतिक्रमण हटाने का नोटिस सीएमओ द्वारा जारी किया गया है, इस पर वही जवाब देंगे। तहसील न्यायालय में मामला चल रहा है।”
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया…..
ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को मनमानी और न्यायिक प्रक्रिया से खिलवाड़ करार दिया। उनका कहना है कि जब तहसील न्यायालय में केस विचाराधीन है, तब समानांतर आदेश निकालना कानून की अवमानना है। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
गिरधारीलाल और उनके परिवार ने कहा –…
“हमने न्यायालय में केस दर्ज कराया है और मामला अभी विचाराधीन है। फिर भी प्रशासन हमें परेशान करने और दुकान खाली कराने का दबाव बना रहा है। नोटिस जारी करने के पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ है। यदि न्यायालय में लंबित मामलों में भी प्रशासन इस तरह से दबाव बनाएगा तो आम जनता का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो जाएगा।”
अब नजर जिला प्रशासन पर…..
यह पूरा मामला अब जिला प्रशासन की जांच और निर्णय पर टिका है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो न्यायिक व्यवस्था की निष्प















