गौरेला में वित्तीय अनियमितता का खुलासा, डीएससी घोटाले से हड़कंप, ऑपरेटर दीपक जायसवाल सेवा से पृथक_

गौरेला में वित्तीय अनियमितता का खुलासा, डीएससी घोटाले से हड़कंप, ऑपरेटर दीपक जायसवाल सेवा से पृथक
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही- जनपद पंचायत गौरेला में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। कलेक्टर दर पर पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक जायसवाल को डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) का दुरुपयोग कर फर्जी भुगतान करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। जनपद सीईओ गौरेला ने आदेश जारी कर दीपक जायसवाल को कंप्यूटर ऑपरेटर के दायित्वों से पृथक कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, सहायक लेखाधिकारी जनपद पंचायत गौरेला और विभिन्न ग्राम पंचायतों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि दीपक जायसवाल ने लेखा अधिकारी के डीएससी का उपयोग कर राशि विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दी है। जांच में सामने आया कि डीएससी लंबे समय से दीपक जायसवाल के पास रखा हुआ था। यही नहीं, उसने सहायक लेखाधिकारी की प्रोफाइल में नया ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर भी जनरेट कर लिया था।

जनपद पंचायत के अधिकारियों ने इस कृत्य को गंभीर लापरवाही, वित्तीय अनियमितता और आर्थिक अपराध की श्रेणी में माना है। बताया जा रहा है कि दीपक जायसवाल सितंबर 2025 से ही लगातार अनुपस्थित था। प्रथम दृष्टया उसे जिम्मेदार मानते हुए जनपद पंचायत ने तत्काल प्रभाव से उसके पद से पृथक कर दिया है।
इसके साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना गौरेला में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। अब पुलिस स्तर पर भी जांच शुरू हो गई है।
स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चाओं में है क्योंकि 15वें वित्त की राशि ग्रामीण विकास और पंचायत कार्यों में उपयोग की जानी थी, लेकिन फर्जी भुगतान से न केवल वित्तीय अनुशासन भंग हुआ है बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों से शासन की योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।






