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“दावा-आपत्ति सिर्फ औपचारिकता? अंतिम सूची में नहीं हुआ सुधार, शिक्षा विभाग पर पक्षपात के आरोप”

“दावा-आपत्ति सिर्फ औपचारिकता? अंतिम सूची में नहीं हुआ सुधार, शिक्षा विभाग पर पक्षपात के आरोप”

 

बिलासपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर द्वारा जारी सहायक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। इस सूची को लेकर जिले के शिक्षकों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। कई सहायक शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि सूची में जानबूझकर उनके नामों को शामिल नहीं किया गया, जबकि उन्होंने नियमानुसार दावा-आपत्ति के दौरान लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई थी। शिक्षकों का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय जीपीएम की लापरवाही और मनमानी के चलते ही यह स्थिति बनी है। आरोप है कि कार्यालय ने आपत्तियों को गंभीरता से लेने के बजाय नजरअंदाज कर दिया, जिसका सीधा असर वरिष्ठता सूची में देखने को मिला है।
दावा-आपत्ति के बाद भी नहीं हुआ सुधार
प्रभावित शिक्षकों ने बताया कि पहले जारी सूची में नाम नहीं होने पर उन्होंने नियमानुसार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बावजूद अंतिम सूची में सुधार नहीं किया गया और कई योग्य शिक्षकों के नाम फिर से गायब कर दिए गए। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई थी?
हाई कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी मामले को लेकर सहायक शिक्षकों ने न्याय की मांग करते हुए हाई कोर्ट बिलासपुर का दरवाजा भी खटखटाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जो शिक्षक शिक्षा कर्मी रहते हुए एक विकासखंड से दूसरे विकासखंड में स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें उनकी मूल नियुक्ति तिथि से ही वरिष्ठता दी जाए।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस स्पष्ट आदेश के बावजूद भी विभाग ने वरिष्ठता सूची तैयार करते समय इन निर्देशों को दरकिनार कर दिया।
शिक्षकों में बढ़ा आक्रोश, आंदोलन के संकेत वरिष्ठता में गड़बड़ी से प्रभावित शिक्षक अब खुलकर विरोध में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सूची में सुधार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने के साथ-साथ पुनः न्यायालय का सहारा लेंगे। बड़ा सवाल क्या शिक्षा विभाग जानबूझकर कुछ शिक्षकों के साथ भेदभाव कर रहा है? हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नियमों की अनदेखी क्यों?आखिर किसके संरक्षण में चल रही है यह “वरिष्ठता की गड़बड़ी”?अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर शिक्षकों को न्याय के लिए फिर अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

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