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डीईओ के औचक निरीक्षण ने हिलाया शिक्षा तंत्र, गैरहाजिर शिक्षक और कमजोर बुनियादी शिक्षा बनी बड़ी चिंता

डीईओ के औचक निरीक्षण ने हिलाया शिक्षा तंत्र, गैरहाजिर शिक्षक और कमजोर बुनियादी शिक्षा बनी बड़ी चिंता…!

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।जिले में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी का निरीक्षण अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में उन्होंने हायर सेकेण्डरी स्कूल लालपुर का औचक निरीक्षण किया, जिससे स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों में हड़कंप मच गया।

निरीक्षण के दौरान शिक्षकों के उपस्थिति रजिस्टर की जांच में यह सामने आया कि संस्था के पाँच शिक्षक बिना किसी वैध कारण के अवकाश लेकर अनुपस्थित थे। इस लापरवाही को अध्यापन कार्य में गंभीर उदासीनता मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी अनुपस्थित शिक्षकों का एक दिन का वेतन अवैतनिक करने के निर्देश दिए।

जिला शिक्षा अधिकारी ने कक्षा दसवीं एवं बारहवीं के विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देशित किया कि सभी विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय बुलाया जाए तथा परीक्षा पूर्व तक गंभीरता से अध्यापन कार्य कराया जाए, ताकि विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम दे सकें।

निरीक्षण के दौरान शिक्षकों द्वारा अपने-अपने विषयों में विद्यार्थियों से लिए गए टेस्ट की कॉपियों का भी गहन अवलोकन किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षण गुणवत्ता में सुधार लाने तथा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक सीख पर ध्यान देने के निर्देश दिए।

इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मिडिल स्कूल लालपुर सहित अन्य विद्यालयों का भी निरीक्षण किया गया, जहाँ बच्चों की उपस्थिति सामान्य पाई गई तथा शिक्षक उपस्थित मिले।

इसी बीच शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिले के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता अभी बेहद चिंताजनक स्तर पर है। कई प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पाँच तक के बच्चे न तो हिंदी ठीक से पढ़ पा रहे हैं और न ही लिखने की स्थिति में हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जानकारों का मानना है कि यदि शुरुआती कक्षाओं में ही बच्चों की नींव कमजोर रही तो आगे की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं में परिणाम सुधरना मुश्किल होगा। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों को अतिरिक्त मेहनत करते हुए बच्चों की बुनियादी पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी के साथ उल्लास साक्षरता कार्यक्रम के नोडल अधिकारी आलोक शुक्ला भी उपस्थित रहे। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिए कि आने वाले दिनों में प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता को लेकर भी सघन निरीक्षण किया जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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