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राष्ट्रीय खेल में प्रशासनिक फेलियर: DEO विजय टांडे की लापरवाही से खाली रहा मंच, कलेक्टर भड़के, मंत्रालय तक हड़कंप

राष्ट्रीय खेल में प्रशासनिक फेलियर: DEO विजय टांडे की लापरवाही से खाली रहा मंच, कलेक्टर भड़के, मंत्रालय तक हड़कंप

बिलासपुर। 69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का उद्घाटन, जो बिलासपुर जिले के लिए गौरव और सम्मान का क्षण होना था, वह प्रशासनिक लापरवाही, अहंकार और कथित भ्रष्ट कार्यप्रणाली का प्रतीक बनकर सामने आया। राष्ट्रीय स्तर का यह आयोजन जिले के लिए उपलब्धि बनने के बजाय शर्मनाक, विस्फोटक और सवालों से भरा घटनाक्रम बन गया। इस पूरे प्रकरण के केंद्र में हैं—जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे, जिन पर पहले से ही भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और मनमानी के गंभीर आरोप लगे हुए हैं। इस बार उनकी कार्यशैली ने न केवल आयोजन को पटरी से उतार दिया, बल्कि पूरे बिलासपुर जिले को राष्ट्रीय मंच पर कटघरे में खड़ा कर दिया।

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कार्ड में सत्ता के बड़े चेहरे, लेकिन मंच पर सन्नाटा

आयोजन के लिए जो आमंत्रण पत्र छपवाए गए, उनमें सत्ता और प्रशासन के तमाम बड़े नाम शामिल किए गए, मुख्य अतिथि
खेल एवं युवा कल्याण विभाग के उपमुख्यमंत्री अरुण साव
विशिष्ट अतिथि बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल
बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिकतखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह,बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला,मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव,अन्य अतिथि,क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी,पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष राजा पांडे,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष रजनीश सिंह महापौर पूजा विधानी जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी
लेकिन वास्तविकता चौंकाने वाली रही।
कार्ड तो छप गए, नाम बड़े-बड़े लिख दिए गए, लेकिन न तो किसी को आधिकारिक निमंत्रण भेजा गया, न फोन कॉल किया गया, न किसी स्तर पर समन्वय हुआ। यह स्थिति साधारण प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही और संदिग्ध कार्यप्रणाली की ओर सीधा इशारा करती है।

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कलेक्टर की एंट्री, और तुरंत खुल गई पोल

कार्यक्रम शुरू होने से लगभग एक घंटे पहले कलेक्टर संजय अग्रवाल आयोजन स्थल पहुंचे। मंच पर खाली कुर्सियां, अतिथियों की अनुपस्थिति और पूरी व्यवस्था की बदहाली देखकर उन्होंने तुरंत भांप लिया कि मामला गंभीर है।
उन्होंने मौके पर ही आयोजन प्रभारी और DEO विजय टांडे को तलब किया।

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अतिथि बुलाए ही नहीं?” — कलेक्टर का फूटा गुस्सा

कलेक्टर ने सीधे और तीखे सवाल दागे—
मुख्य अतिथि कब आएंगे?
किस अधिकारी ने सूचना दी?
किस स्तर पर संपर्क किया गया?
जब जवाब मिला कि
न कोई लिखित सूचना भेजी गई
न कोई टेलीफोनिक संपर्क हुआ
तो कलेक्टर का आपा टूट गया।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा—
“इतनी बड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ऐसी लापरवाही वही कर सकता है, जिसे जिम्मेदारी का कोई मतलब न हो।”

विजय टांडे पर सीधा हमला — “तुम काबिल नहीं हो”!

सूत्रों के मुताबिक कलेक्टर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि—
“ऐसे अधिकारी राष्ट्रीय आयोजनों को मजाक बना देते हैं।”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि—
जब आयोजन कराने की क्षमता नहीं थी, तो इसे ऊपर स्तर से अपने हाथ में लेने की जरूरत क्यों पड़ी?”
इसी दौरान
PTI शिक्षक साजिद खान
खेल अधिकारी कमलेश यादव
को भी कलेक्टर ने जमकर फटकार लगाई।
यहां तक कह दिया—
“तुम लोग किसी लायक नहीं हो, और इस मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
यह फटकार सार्वजनिक और बेहद कड़ी थी, जिससे पूरा आयोजन स्थल सन्न रह गया।
राष्ट्रीय आयोजन ने खोल दी पुरानी फाइलें
DEO विजय टांडे का नाम पहली बार विवादों में नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि—
विभागीय आयोजनों में अनियमितताएं
वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें
मनमानी फैसले अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव
पहले भी उनके खिलाफ उच्च स्तर तक पहुंच चुके हैं। लेकिन अधिकांश मामलों में कार्रवाई फाइलों में दबाकर रख दी गई।
69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की यह अव्यवस्था उसी लापरवाह और जवाबदेही-विहीन कार्यसंस्कृति की अगली कड़ी मानी जा रही है।

भारी बजट, लेकिन ज़मीन पर शून्य तैयारी

नियमानुसार यह आयोजन संयुक्त संचालक शिक्षा स्तर पर होना था।
लेकिन सूत्रों का दावा है कि, भारी बजट को देखते हुए विजय टांडे और उनकी टीम ने आयोजन अपने स्तर पर रखने के लिए जोर-तोड़ की।
कार्ड छपवाए गए, नाम जोड़े गए, लेकिन सूचना जानबूझकर नहीं दी गई।
यही कारण है कि अब इस पूरे प्रकरण पर भ्रष्ट नीयत और निजी नियंत्रण की आशंका और गहराती जा रही है।

खिलाड़ियों पर भी पड़ा सीधा असर

अफरातफरी, अव्यवस्था और अधिकारियों की आपसी खींचतान का असर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के मनोबल पर भी साफ दिखा।खेल भावना, अनुशासन और प्रेरणा के बजाय यह आयोजन अव्यवस्था,तनाव, प्रशासनिक विफलता
का प्रतीक बन गया। CEO संदीप अग्रवाल की दखल से बचा कार्यक्रम पूरे तनावपूर्ण हालात में जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उनकी सक्रियता के चलते जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी को बुलाया गया
औपचारिक शुभारंभ कराया जा सका
वरना आयोजन पूरी तरह ध्वस्त हो जाता।

मंत्रालय तक पहुंची रिपोर्ट, हटाने की चर्चा तेज
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि—
इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट सीधे मंत्रालय स्तर तक भेजी जा चुकी है विजय टांडे को पद से हटाने को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन

कलेक्टर की सार्वजनिक नाराजगी
राष्ट्रीय मंच पर हुई फजीहत

कई बड़े संकेत दे रही है। सवाल सिर्फ आयोजन का नहीं, पूरे सिस्टम का यह मामला केवल एक कार्यक्रम की नाकामी नहीं है। यह उस सिस्टम का आईना है—जहां जवाबदेही से बचा जाता है जहां पद को निजी जागीर समझा जाता है
जहां राष्ट्रीय मंच भी व्यक्तिगत स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया जाता है अब सवाल है—क्या इस शर्मनाक लापरवाही पर ठोस कार्रवाई होगी, या यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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