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फर्जी भुगतान, संदिग्ध ट्रांसफर और करोड़ों का खेल! पंचायत विभाग में मचा प्रशासनिक भूचाल”

फर्जी भुगतान, संदिग्ध ट्रांसफर और करोड़ों का खेल! पंचायत विभाग में मचा प्रशासनिक भूचाल”

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले में नवपदस्थ कलेक्टर डॉ. संतोष प्रसाद देवांगन ने जैसे ही कार्यभार संभाला, वैसे ही प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ा विस्फोट हो गया। जनपद पंचायत गौरेला में 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित करोड़ों रुपए के गबन और फर्जी भुगतान का मामला अब खुलकर सामने आने लगा है।

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भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री महेश राठौर ने नए कलेक्टर को एक तीखा और आक्रामक शिकायत पत्र सौंपते हुए भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों, कंप्यूटर ऑपरेटर और कथित सामग्री सप्लायरों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है। शिकायत सामने आते ही पंचायत विभाग, जनपद कार्यालय और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

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महेश राठौर ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि 15वें वित्त आयोग की राशि, जो ग्रामीण विकास और पंचायतों के बुनियादी कार्यों के लिए जारी की गई थी, उसे योजनाबद्ध तरीके से फर्जी भुगतान और फर्जी आहरण के जरिए निजी खातों तक पहुंचाया गया। शिकायत में कहा गया है कि पंचायतों के खातों से राशि ट्रांसफर कर कथित सप्लायरों के खातों में भेजी गई और इस पूरे खेल में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) तथा कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका सबसे अधिक संदिग्ध रही।

“गांवों के विकास का पैसा भ्रष्टाचारियों ने निगल लिया”

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भाजयुमो नेता ने आरोप लगाया कि जिन पैसों से गांवों में सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, पेयजल व्यवस्था और अन्य विकास कार्य होने थे, वही राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई।

उन्होंने कहा कि गांवों में कई काम आज भी अधूरे पड़े हैं, कई कार्यों का भुगतान एक साल से अटका हुआ है, लेकिन दूसरी तरफ करोड़ों रुपए फर्जी तरीके से निकाल लिए गए। इससे साफ है कि विकास कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज कर सरकारी धन को “कमाई का जरिया” बनाया गया।

महेश राठौर ने कहा कि “यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीब ग्रामीणों के अधिकारों की खुली लूट है। पंचायतों के नाम पर सरकारी पैसा निकालकर बंद कमरों में बांट दिया गया और जनता को अंधेरे में रखा गया।”

“जनपद में बैठकर चला करोड़ों का खेल”

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित हुआ। पहले 15वें वित्त आयोग की राशि पंचायतों के खातों में ट्रांसफर की गई और फिर वहां से सप्लायरों के खातों में भुगतान दिखाकर रकम निकाल ली गई।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी राशि बिना विभागीय मिलीभगत के कैसे निकल गई? यदि भुगतान वास्तविक था तो कार्य धरातल पर क्यों दिखाई नहीं दे रहे? और यदि कार्य हुए हैं तो फिर पिछले एक वर्ष से वास्तविक ठेकेदारों और कार्य एजेंसियों का भुगतान लंबित क्यों है?

इन सवालों ने पूरे पंचायत सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

“जनप्रतिनिधियों को भी रखा गया अंधेरे में”

महेश राठौर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन अधिकारियों ने जनपद सदस्यों तक पूरी वित्तीय जानकारी पहुंचने ही नहीं दी। कई भुगतान और ट्रांसफर ऐसे तरीके से किए गए कि जनप्रतिनिधियों को वास्तविक स्थिति का पता तक नहीं चल सका।

उन्होंने कहा कि “यदि जनपद सदस्यों को समय पर सही जानकारी मिलती तो करोड़ों रुपए का यह कथित गबन रोका जा सकता था। लेकिन जानबूझकर जानकारी छिपाई गई और पूरे सिस्टम का दुरुपयोग किया गया।”

“अब तक FIR क्यों नहीं?”

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायतें हो चुकीं, जांच में अनियमितताओं की बातें सामने आ चुकीं, तब तक दोषियों पर FIR क्यों नहीं हुई? आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा मामला दबा रहा?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मामला केवल विभागीय लापरवाही का नहीं बल्कि बड़े संरक्षण और नेटवर्क का हो सकता है। यही कारण है कि अब तक किसी बड़े अधिकारी पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई।महेश राठौर ने साफ कहा कि यदि करोड़ों रुपए के मामले में भी केवल जांच और नोटिस का खेल चलता रहा तो जनता का प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा।

नए कलेक्टर के सामने पहली बड़ी चुनौती”

जिले में नए कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन की पदस्थापना के बाद यह पहला बड़ा मामला सामने आया है। ऐसे में पूरे जिले की नजर अब कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

लोगों के बीच चर्चा है कि क्या नए कलेक्टर भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों और जांच समितियों के बीच दब जाएगा। यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई होती है तो पंचायत विभाग में वर्षों से जमे भ्रष्टाचार के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार माना जाएगा।

“रिकवरी कराओ, दोषियों को जेल भेजो”

भाजयुमो नेता ने मांग की है कि कथित गबन की गई राशि तत्काल संबंधित लोगों से वसूली जाए ताकि वास्तविक विकास कार्यों का भुगतान किया जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन सप्लायरों के खातों में राशि गई उनसे पूछताछ कर यह पता लगाया जाए कि पैसा किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को खत्म करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। पूरे नेटवर्क को बेनकाब करना जरूरी है।

“कार्रवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरेगा , उन्होंने कहा कि “जनता के विकास का पैसा खाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

फिलहाल पूरे जिले में यही चर्चा है कि नए कलेक्टर के कार्यभार ग्रहण करते ही सामने आया यह कथित करोड़ों का घोटाला आने वाले दिनों में कई बड़े चेहरों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

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