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वन तस्कर जंगलों की बेशकीमती लकड़ी को काटकर खुलेआम कर रहे तस्करी, विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध…..?

वन तस्कर जंगलों की बेशकीमती लकड़ी को काटकर खुलेआम कर रहे तस्करी, विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध…..?

जीपीएम :-मरवाही क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम पंचायत रूमगा, मटिया डाँड़ के वीड से वन तस्कर जंगलों की बेशकीमती लकड़ी को काटकर खुलेआम तस्करी कर रहे है।


यहाँ के वीड गार्ड परमेश्वर नवरंग है,जिसकी मिलीभगत संदिग्ध नजर आ रहा है,बता दें कि मरवाही रोड रूमगा के सड़क किनारे लगे सगौन आखिर किसकी निगरानी में है…?

अगर निगरानी में तो फिर अवैध कटाई और तस्करी क्यों…?

मरवाही रेंज का है जहां वेखौफ वन तस्करों ने सगौन,जैसे बेशकीमती, जिन्होंने बेशक़ीमती लकड़ी तस्करी के खेल का खुलासा किया है।

आखिर विभाग क्यों है मौन…?

फिलहाल वन विभाग पूरे मामले को लीपा पोती करने की कोशिश कर रहा है। वही वन विभाग के कर्मचारियों ने तस्करों के साथ अपनी कमियों को छुपाने के लिए सामने नही आ रहे हैं।,,,आखिर क्यों…?

बेसकीमती लकड़ी का महत्व,

बेसकीमती लकड़ी की तस्करी एक गंभीर अपराध है, जिसमें दुर्लभ और कीमती लकड़ियों का अवैध रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवहन किया जाता है। इसमें खासकर उन लकड़ियों की तस्करी शामिल होती है जो पर्यावरण के लिए खतरनाक हो सकती हैं या जिन्हें संरक्षण की आवश्यकता होती है, जैसे कि सागवान आदि।

किस तरह बिगड़ती है, पर्यावरण

इस तरह की तस्करी पर्यावरणीय असंतुलन, जैव विविधता के नुकसान, और स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह व्यापार आमतौर पर अवैध रूप से जंगलों से लकड़ियों की कटाई करके किया जाता है, जो वन्य जीवन और वनस्पति को नुकसान पहुँचाता है।

भारत में, वन्यजीवों और वनस्पतियों की तस्करी को रोकने के लिए “वन संरक्षण अधिनियम” और “वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट” जैसे कड़े कानून हैं, लेकिन फिर भी तस्करी की घटनाएँ जारी रहती हैं। इसे रोकने के लिए सख्त निगरानी, सामुदायिक जागरूकता और कड़ी सजा की आवश्यकता है।

अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में विभाग क्या कार्यवाही करती है…?

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