LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंदेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

गौरेला-पेंड्रा- मरवाही:- एक दिन में 51,727 जांच – वर्ल्ड रिकॉर्ड या आंकड़ों की कहानी….?”

गौरेला पेंड्रा मरवाही:- एक दिन में 51,727 जांच – वर्ल्ड रिकॉर्ड या आंकड़ों की कहानी….?”

रायपुर/जीपीएम : – गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिला एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी राजमेरगढ़ में Best Eco Tourism Site के लिए मिला अवार्ड तो कभी रक्त शक्ति महा अभियान के नाम पर बने वर्ल्ड रिकॉर्ड के कारण। दोनों ही उपलब्धियों में एक समानता है कागज़ों में चमक, ज़मीन पर सवाल।

एक दिन में 51,727 जांच वर्ल्ड रिकॉर्ड या आंकड़ों का कमाल..? –

26 जून को जिला प्रशासन ने एनीमिया मुक्त भारत और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रमों के तहत रक्त शक्ति महा अभियान चलाया। प्रशासन का दावा है कि 13 से 45 वर्ष आयु वर्ग की 51,727 महिलाओं का हीमोग्लोबिन (Hb) टेस्ट एक ही दिन में किया गया और इसी पर जीपीएम जिले का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। जिसका उद्देश्य यह बताया गया कि एनीमिया प्रभावित महिलाओं की वास्तविक जानकारी प्राप्त करना और जिनका Hb स्तर 7 ग्राम से कम है, उन्हें पृथक योजना से लाभान्वित करना। लेकिन सवाल क्या एक ही दिन में इतनी जांचें वास्तव में संभव थीं? क्या उन महिलाओं का आगे इलाज या फॉलो-अप हुआ? क्या यह डेटा आज भी वैध और अपडेटेड है?

आंकड़ों का जादू और खबरों की बाढ़ –

जिले की कलेक्टर इन्हीं आकड़ों को आधार बनाकर राज्यभर में ख़ूब खबरें चलवा रही हैं जहाँ पोस्टरों में वर्ल्ड रिकॉर्ड का ज़िक्र है, वहीं ग्राउंड पर स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और सुविधाओं की सच्चाई वही पुरानी है। कई स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि अभियान के बाद न तो रीकॉल टेस्ट हुए, न सप्लीमेंट वितरण की निगरानी। अभियान बस एक दिन चला, लेकिन उसकी चर्चा हफ्तों तक चली।

गोल्डन बुक में नाम, पर सच्चाई –

जानकार बताते हैं कि गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड कोई सरकारी अथवा वैज्ञानिक संस्था नहीं, बल्कि एक प्राइवेट रजिस्ट्री है जो शुल्क लेकर रिकॉर्ड दर्ज करती है। कई जिलों ने इससे पहले सबसे बड़ी रैली, सबसे अधिक पौधारोपण और सबसे लंबा पोस्टर जैसे रिकॉर्ड बनाए जिनका वास्तविक असर शून्य रहा।

राजमेरगढ़ अवार्ड जैसा ही हाल –

हाल ही में इसी जिले को Best Eco Tourism Site 2025 के लिए राज्य स्तरीय सम्मान मिला। कलेक्टर ने रायपुर जाकर यह पुरस्कार ग्रहण किया, जबकि उसी राजमेरगढ़ में अधूरे भवन, टूटी सड़कें और अवैध निर्माण आज भी खड़े हैं। एनजीटी के आदेशों के बावजूद यहाँ कंक्रीट का जंगल उगाया गया और अब उसी स्थल को ईको-टूरिज्म मॉडल कहा जा रहा है।

दोनों उपलब्धियाँ एक ही पैटर्न : –

51 हज़ार जांचें हों या ईको टूरिज्म अवार्ड” दोनों में एक समानता है कागज़ों में उत्कृष्टता, ज़मीन पर अधूरापन। अभियान और अवार्ड दोनों का नतीजा जनता तक नहीं पहुँचा, पर प्रेस नोट और पोस्टर हर जगह पहुँच गए।
जिला प्रशासन के लिए यह उपलब्धि की रिपोर्ट है, जबकि जनता के लिए यह जवाबदेही का सवाल।

राजमेरगढ़ का अधूरा विकास हो या रक्त शक्ति महा अभियान का रिकॉर्ड, जीपीएम जिला आज कागज़ी उपलब्धियों का पोस्टर बन चुका है। पुरस्कार, रिकॉर्ड और प्रचार की भीड़ में अब बस एक ही आवाज़ बाकी है वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया, पर असली सुधार कब होगा?”

Back to top button
error: Content is protected !!