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गौरेला पेंड्रा मरवाही :- शासन की नियम व्यवस्था बनी तमाशा नियम चिल्लाता रहा, और इधर नियम के विपरीत छात्रावास अधीक्षकों की अनुमोदन की तैयारी चल रहा..?

जिला प्रशासन फिर सवालों के घेरे में क्या..? लेन-देन और नियम उल्लंघन के आरोप।

मिथलेश आयम/गौरेला–पेंड्रा–मरवाही :- जिले में छात्रावासों में अधीक्षक नियुक्ति को लेकर बड़ा घोटाला उजागर हो रहा है। आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त गौरेला पर आरोप है कि वे शिक्षा विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिए बिना ही शिक्षकों को छात्रावास अधीक्षक नियुक्त कर रहे हैं ?

शासन के नियमों की खुली धज्जियां ?

शासन के आदेश अनुसार केवल उन्हीं शिक्षकों को अधीक्षक बनाया जा सकता है जिनकी कार्यस्थली अधिकतम 10 किलोमीटर की परिधि में हो। इसके बावजूद दूर-दराज के शिक्षकों को पदस्थ किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से कार्यवाही की है।

भारी भरकम लेन-देन की चर्चाएं सूत्र..?

सूत्र बताते हैं कि अधीक्षक बनाने की प्रक्रिया में पैसे के लेन-देन की भी चर्चा है। जिन शिक्षकों के खिलाफ पूर्व में शिकायतें हुई थीं और उन्हें पद से हटाया गया था, उन्हें फिर से अधीक्षक बनाने की तैयारी तेज है। इससे नियुक्तियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रभारी मंडल संयोजक की मनमानी :- 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अधीक्षक नियुक्ति में प्रभारी मंडल संयोजक की सिफारिश को ही अंतिम माना जा रहा है। आरोप है कि मंडल संयोजक अशोक मशरम (पेंड्रा) और लोरीक सनेही (गौरेला) अपने पसंदीदा शिक्षकों को उपकृत करने में लगे हुए हैं। जबकि हकीकत यह है कि मंडल संयोजकों की जिम्मेदारी केवल रेगुलर अधीक्षकों के समन्वय तक सीमित है, न कि मनमाने नाम सुझाने की। इसके बावजूद वे मौन रहकर नियमों को दरकिनार कर रहे हैं।

शिक्षक संघ और अभिभावकों में आक्रोश :- 

शिक्षक संगठनों और अभिभावक संघों का कहना है कि यह नियम विरुद्ध और मनमाना कदम है, जो शिक्षा व्यवस्था और छात्रावासों की कार्यप्रणाली पर बुरा असर डालेगा। एक शिक्षक प्रतिनिधि का कहना है कि “शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद इस तरह की नियुक्तियां विभागीय मिलीभगत का परिणाम हैं। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो हम आंदोलन करने को बाध्य होंगे।”

जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल :- 

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन सख्त कदम उठाए तो इस तरह की अनियमितताएं संभव ही नहीं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर अधिकारियों की मनमानी यूँ ही जारी रहेगी। सूत्रों से मिली जानकारी :-

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