
कुरदर में राजस्व विभाग, भू-माफिया और आधार सेंटर के गठजोड़ का पर्दाफाश; 2002 के रिकॉर्ड में जो जमीन बैगा आदिवासी की थी, आज उस पर दूसरों का कब्जा कैसे?
*जीशान अंसारी की रिपोर्ट,बिलासपुर। बिलासपुर जिले के तहसील बेलगहना अंतर्गत ग्राम पंचायत कुरदर (प.ह.नं. 13) में राजस्व तंत्र और भू-माफियाओं की नापाक मिलीभगत का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां खसरा नंबर 14 की भूमि पर ‘भूतिया रजिस्ट्री’ का ऐसा खुला खेल खेला गया है, जिसने राजस्व विभाग की पूरी सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों में सरेआम कूट-रचना कर एक आदिवासी की जमीन को हड़पने का मामला सामने आया है, लेकिन इसकी पटकथा बेहद चौंकाने वाली है। फर्जीवाड़े का आधार सिर्फ एक ‘नाम’ को बनाया गया। वर्ष 2002-03 के राजस्व रिकॉर्ड स्पष्ट गवाही देते हैं कि यह भूमि अमोल सिंह (पिता अंजोरी), जो कि एक बैगा आदिवासी हैं, के नाम पर दर्ज थी। लेकिन भू-माफियाओं ने इसी ‘अमोल सिंह’ नाम का फायदा उठाया और आज वर्तमान रिकॉर्ड में यह जमीन नाथूराम यादव (पिता अमोल सिंह यादव, निवासी कुरदर) व अन्य के नाम पर दर्ज कर दी गई है।

आधार सेंटर से लेकर तहसील दफ्तर तक सेटिंग का खेल:-
एक बैगा आदिवासी की जमीन अचानक से किसी यादव के पुरे परिवार के नाम कैसे ट्रांसफर हो गई? यह कोई लिपिकीय त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है। जमीन की इस ‘अल्टी-पल्टी’ में आधार सेंटर से बनाए गए फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों मे राजस्व अधिकारियों की कलम तक का भरपूर इस्तेमाल हुआ है। यह फर्जीवाड़ा साबित करता है कि दलालों और भू-माफियाओं की पहुंच सिस्टम की कितनी गहराई तक है।

क्या उच्चाधिकारी तोड़ेंगे अपनी चुप्पी? :-
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिले में बैठे उच्चाधिकारी इस खुले भ्रष्टाचार पर संज्ञान लेंगे? या फिर भू-माफियाओं और भ्रष्ट कर्मचारियों को सिस्टम का यह मौन संरक्षण यूं ही मिलता रहेगा? पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों में हुए इस जादुई परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध है और सीधे तौर पर राजस्व अमले की संलिप्तता की ओर इशारा करती है।

उच्चस्तरीय जांच और FIR की मांग :-
इस पूरे प्रकरण में वर्ष 2002-03 से लेकर वर्तमान तक के खसरा, बी-1, नामांतरण पंजी, संबंधित आदेशों और मूल राजस्व अभिलेखों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होना नितांत आवश्यक है। यदि दस्तावेजों की जांच में कूट-रचना, फर्जीवाड़ा और अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो संबंधितों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज कर कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए, साथ ही राजस्व अभिलेखों को नियमानुसार दुरुस्त कर पीड़ित को न्याय दिलाया जाए।















