तालाब गहरीकरण या मुरूम का काला कारोबार? प्रशासन ने जब्त किए दो चैन माउंटिंग वाहन, फिर रातों-रात गायब!

तालाब गहरीकरण या मुरूम का काला कारोबार? प्रशासन ने जब्त किए दो चैन माउंटिंग वाहन, फिर रातों-रात गायब!
सिमगा के खिलोरा में ग्रामीणों के आरोपों ने खोली पोल, तहसीलदार की कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल—जब्त वाहन आखिर किसके संरक्षण में हटाए गए?

सिमगा (छत्तीसगढ़)।सिमगा तहसील के ग्राम खिलोरा में तालाब गहरीकरण के नाम पर कथित रूप से चल रहे मुरूम के अवैध कारोबार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों और पत्रकारों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मौके पर पहुंचकर बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्खनन में लगे दो चैन माउंटिंग वाहनों को जब्त कर लिया। लेकिन कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद जब्त वाहन मौके से गायब हो जाने की खबर ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निस्तारी तालाब के गहरीकरण की आड़ में लंबे समय से भारी मात्रा में मुरूम निकाला जा रहा था और उसका खुलेआम व्यावसायिक परिवहन किया जा रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि विकास कार्य के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा था, जबकि प्रशासन की नजरें लंबे समय तक इस ओर नहीं गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार सिमगा के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उत्खनन कार्य में लगे दो चैन माउंटिंग वाहनों को जब्त करते हुए विधिवत पंचनामा तैयार किया गया और दोनों वाहनों पर जब्ती आदेश की नोटशीट चस्पा कर दी गई। जानकारी के अनुसार, वाहनों को थाना हथबंद के सुपुर्द किए जाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई थी।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। देर रात यह सूचना सामने आई कि प्रशासन द्वारा जब्त किए गए दोनों वाहन घटनास्थल से हटा लिए गए हैं। यदि यह तथ्य जांच में सही साबित होता है, तो यह केवल अवैध उत्खनन का मामला नहीं रह जाएगा, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देने और सरकारी आदेश की अवहेलना का गंभीर प्रकरण बन सकता है।अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब वाहनों पर जब्ती आदेश चस्पा था, तो उन्हें हटाने की अनुमति किसने दी? क्या संबंधित पक्ष ने प्रशासनिक कार्रवाई को धता बताते हुए वाहन निकाल लिए या फिर इसके पीछे किसी प्रभावशाली संरक्षण का हाथ है? इन सवालों के जवाब का इंतजार पूरे क्षेत्र को है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो तालाब गहरीकरण की आड़ में प्राकृतिक संसाधनों की लूट का सिलसिला जारी रहेगा। वहीं, छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन के पत्रकारों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल राजस्व विभाग द्वारा मामले की जांच जारी है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जब्त वाहनों को नियमों के विरुद्ध हटाया गया है, तो यह मामला अवैध उत्खनन से कहीं आगे बढ़कर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।















