
RTI की उड़ी धज्जियां,स्वास्थ्य विभाग की मनमानी , सिविल सर्जन से, प्रभारी CMHO के पद पर पर पदस्थापना पर उठे गंभीर… सावल !
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगे जाने के बावजूद निर्धारित समय तक सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने का मामला सामने आया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सूचना के अधिकार के तहत पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, आवेदक ने CMHO कार्यालय में RTI के तहत विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, लेकिन आवेदक का कहना है कि आज दिनांक तक उसे मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आम नागरिकों को सरकारी विभागों से जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम का सहारा लेना पड़ता है, तो निर्धारित समय में सूचना उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है?
दूसरे जिले से सिविल सर्जन से प्रभारी CMHO के बाद आए अधिकारी को लेकर भी उठे सवाल

इधर, विभागीय सूत्रों के हवाले से सिविल सर्जन से CMHO के पद पर हुये पदस्थापना और को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अधिकारी की पूर्व पदस्थापना वाले जिले में लाखों रुपये के कथित भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपों की पुष्टि हुई थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित जांच रिपोर्ट और विभागीय आदेशों का सत्यापन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि पूर्व पदस्थापना के दौरान संबंधित अधिकारी के विरुद्ध किसी अनियमितता की पुष्टि हुई थी, तो उसके बाद पदोन्नति की प्रक्रिया किन तथ्यों और नियमों के आधार पर पूरी की गई? क्या इस संबंध में कोई विभागीय जांच, दंडात्मक कार्रवाई या अन्य आदेश जारी हुआ था? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर विभाग से स्पष्टीकरण जरूरी..!

पूरे मामले में दो महत्वपूर्ण बिंदु सामने आते हैं—पहला, RTI आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सूचना उपलब्ध कराई गई या नहीं; दूसरा, अधिकारी की पूर्व पदस्थापना में कथित अनियमितताओं और पदस्थापना से संबंधित रिकॉर्ड में वास्तविक स्थिति क्या है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी RTI आवेदन पर हुई कार्रवाई की जानकारी देते हैं या नहीं तथा संबंधित अधिकारी की पूर्व पदस्थापना, जांच और पद स्थापना जुड़े सवालों पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।
नोट: संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।















