गौरेला पेंड्रा मरवाही : सकोला तहसील में नियमों को ताक में रख कर भ्रष्ट सिस्टम का खुला खेल, तहसीलदार की छत्रछाया में मनमानी कर रहा छात्रावास का रसोइया।

सकोला, कोटमी (विशेष संवाददाता): सकोला तहसील में भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है जहाँ छात्रावास में रसोइए की जिम्मेदारी निभा रहा जितेन्द्र पुरी, अब तहसील कार्यालय में ‘बाबूगिरी’ करता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि वह तहसीलदार की छत्रछाया में रहते हुए खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार जितेन्द्र पुरी न सिर्फ कार्यालय में सीनियर कर्मचारियों पर धौंस जमाता है, बल्कि फौती नामांतरण जैसे संवेदनशील मामलों में लोगों से पैसे की माँग करता है। पैसे न देने पर ज़रूरी दस्तावेज़ों को जानबूझकर गायब कर दिया जाता है, जिससे आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
छात्रावास में भी हाल बेहाल
बताया जा रहा है कि जितेन्द्र पुरी मूलतः एक छात्रावास में रसोइए के पद पर कार्यरत है, लेकिन उसका ध्यान छात्रों को पौष्टिक भोजन देने के बजाय तहसील कार्यालय में ‘राजनीति’ खेलने में ज्यादा रहता है। इसके चलते छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। आरोप है कि बच्चों को पोषण न मिलने के कारण कई बार उनकी तबीयत बिगड़ने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं।
निर्वाचन कार्य के बहाने जमा लिया तहसील में डेरा
प्रशासन द्वारा निर्वाचन कार्य में अस्थायी रूप से लगाए जाने के बाद, जितेन्द्र पुरी ने तहसीलदार से संबंध मजबूत कर स्थायी रूप से तहसील में डेरा जमा लिया है। सवाल यह उठता है कि एक रसोइए का तहसील कार्यालय में क्या काम? क्या यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन नहीं?
अब सवाल ये उठता है – क्या आदिवासी विकास विभाग सोया हुआ है?
इस पूरे मामले पर अब निगाहें आदिवासी विकास विभाग पर टिकी हैं। क्या वे इस अव्यवस्था और भ्रष्टाचार पर कोई संज्ञान लेंगे?
प्रशासनिक मौन, जनता परेशान
जनता का कहना है कि यदि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे और आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।





