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मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम—चीतल कांड में विभाग की भूमिका पर सवाल!”

“मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम—चीतल कांड में विभाग की भूमिका पर सवाल!”

जीशान अंसारी खोंगसरा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)खोंगसरा वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों और विभागीय लापरवाही का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। 26 जुलाई 2025 को रेल हादसे में एक नर चीतल की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद आज 10 महीने बाद भी अधर में लटका हुआ है। न तो जांच पूरी हो पाई है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर ठोस कार्रवाई की गई है।

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स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस मामले की जांच के लिए एसडीओ कोटा को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद पूरी जांच प्रक्रिया ही ठप पड़ गई। इससे यह सवाल उठने लगा है कि कहीं इस मामले को जानबूझकर दबाने की कोशिश तो नहीं की जा रही।

ग्रामीणों और समाजसेवियों द्वारा कई बार इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों और वन मंत्री तक पहुंचाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। शिकायतें फाइलों में दबकर रह गई हैं और विभाग ने चुप्पी साध ली है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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खोंगसरा क्षेत्र में वन्यजीवों की मौतों का सिलसिला भी चिंता का विषय बना हुआ है। एक चीतल की संदिग्ध मौत के बाद उसके शव को पेट्रोल डालकर जलाया गया, जो वन्यजीव प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। इसके अगले ही दिन रेल ट्रैक पर एक और चीतल की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, ग्रामीणों ने क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की भी सूचना दी है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। वनरक्षक कुंजबिहारी पोर्ते के कार्यक्षेत्र में खुले में पोस्टमार्टम और शव जलाने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने केवल औपचारिकता निभाते हुए कुछ कर्मचारियों को नोटिस जारी कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। न तो किसी की जवाबदेही तय की गई और न ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई।

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घटना के 10 महीने बीत जाने के बावजूद न जांच पूरी हुई है और न ही दोषियों पर कार्रवाई की गई है। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वन्यजीवों की सुरक्षा केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है।

अब स्थानीय ग्रामीणों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने शासन और वन मंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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