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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 21 लाख का खेल! जांच में भ्रष्टाचार साबित, फिर भी दोषी अफसर पर मेहरबानी..? मंत्री के गृह जिले में मिली नई पोस्टिंग से उठे सवाल

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 21 लाख का खेल!

जांच में भ्रष्टाचार साबित, फिर भी दोषी अफसर पर मेहरबानी..? मंत्री के गृह जिले में मिली नई पोस्टिंग से उठे सवाल

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मनेन्द्रगढ़। छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार जहां सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की बात कर रही है, वहीं मनेन्द्रगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में सामने आया करोड़ों नहीं तो लाखों का घोटाला अब सरकार और प्रशासन दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। गरीब बेटियों की शादी के लिए चलाई जा रही संवेदनशील योजना में कथित तौर पर 21 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद भी दोषी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं होना लोगों के गले नहीं उतर रहा।

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पूर्व विधायक गुलाब कमरो की शिकायत पर हुई जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितताओं और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों की पुष्टि बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सामग्री खरीदी और बिलिंग में बड़े स्तर पर हेरफेर किया गया।

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एक सामग्री… दो से तीन बार बिलिंग…..!

बताया जा रहा है कि योजना के नाम पर एक ही सामग्री की दो से तीन बार तक बिलिंग की गई। इतना ही नहीं, जिन सामग्रियों की आपूर्ति दिखाई गई, उनका बड़ा हिस्सा सूरजपुर से लाया जाना बताया गया है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में सामग्री खरीदी गई थी या सिर्फ कागजों में भुगतान निकालने का खेल खेला गया?जांच में यह भी सामने आया कि भुगतान और खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई। दस्तावेजों में कई विसंगतियां पाई गईं, जिसके बाद कलेक्टर द्वारा शासन को कार्रवाई हेतु पत्र भेजा गया। यानी प्रशासनिक स्तर पर शिकायत को गंभीर मानते हुए दोष तय करने की प्रक्रिया भी शुरू हुई।

लेकिन कार्रवाई की जगह “इनाम”?

सबसे बड़ा सवाल यहीं से खड़ा होता है। जिन अधिकारी शुभम बंसल पर अनियमितताओं के आरोप लगे और जांच में शिकायत सही पाई गई, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के गृह जिले सूरजपुर में पदस्थ कर दिया गया।

अब विपक्ष ही नहीं, आम लोग भी पूछ रहे हैं कि आखिर यह कैसी प्रशासनिक व्यवस्था है? क्या भ्रष्टाचार साबित होने के बाद भी अधिकारियों को संरक्षण मिल रहा है? क्या गरीब बेटियों के नाम पर हुए वित्तीय खेल को दबाने की कोशिश हो रही है? और यदि जांच सही थी, तो अब तक निलंबन, एफआईआर या विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

“सुशासन” पर उठते सवाल….!

प्रदेश में सुशासन तिहार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बातें लगातार की जा रही हैं। कई जिलों में छोटे कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई होती दिखाई देती है, लेकिन यहां 21 लाख रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए जारी सरकारी राशि में भी भ्रष्टाचार होगा और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिलेगा, तो फिर योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।

मंत्री जी के आश्वासन पर भी सवाल

महिला एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े लगातार महिलाओं और बेटियों के हित की बात करती रही हैं। लेकिन अब विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि जब विभागीय जांच में अनियमितता साबित हो चुकी है, तब दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या मंत्री के आश्वासन सिर्फ मंचों और भाषणों तक सीमित हैं?

प्रशासन की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

पूरे मामले में प्रशासन की चुप्पी भी लोगों को खटक रही है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? शासन स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या आर्थिक अपराध शाखा या लोकायुक्त जांच होगी? इन सवालों का जवाब अब तक नहीं मिला है। इस मामले में कलेक्टर डी राहुल वेंकट ने संचालक, संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग, इंद्रावती भवन ब्लॉक नं 01 द्वितीय तल अटल नगर नवा रायपुर छत्तीसगढ़ को कार्यवाही के लिए पत्र भेजा गया है 

मामला अब सिर्फ 21 लाख रुपये की गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही, प्रशासनिक पारदर्शिता और गरीब हितैषी योजनाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। जनता अब जानना चाहती है कि आखिर न्याय कब होगा और गरीब बेटियों के नाम पर हुए इस कथित भ्रष्टाचार के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?

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