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पेंच रिपेयरिंग का खेल! जीपीएम में सड़कों से ज्यादा गड्ढे, 60 लाख की लागत पर थूक पॉलिश से काम चल रहा , पेंच रिपेयरिंग में लूट का खेल जारी!

पेंच रिपेयरिंग का खेल! जीपीएम में सड़कों से ज्यादा गड्ढे, 60 लाख की लागत पर थूक पॉलिश से काम चल रहा , पेंच रिपेयरिंग में लूट का खेल जारी!

जीपीएम : – जिले में लोक निर्माण विभाग की भर्राशाही चरम पर है। सत्र 2025-26 में करीब 60 लाख रुपए की अनुमानित लागत से सड़क सुधार का कार्य प्रस्तावित है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि सड़कों पर चलना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।

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विडियो से देख सकते किस तरह हाथ से उखड़ रहा है…. पेंच रिपेयर परते…..?

बसंतपुर से कारिआम तक का सड़क मार्ग जो पेंड्रा से बिलासपुर को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग है वर्षों से लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं और विभाग पेंच रिपेयरिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है। स्थानीय लोग तंज कसते हैं अब तो गड्ढे ही सड़क दिखाते हैं कि रास्ता यहीं से है।

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पेंच रिपेयरिंग या पेंच-भराई…?

जानकारी के अनुसार, इस सड़क की मरम्मत के लिए हर साल करोड़ों रुपए का बजट जारी होता है। मगर परिणाम यह है कि जहां रिपेयरिंग होती है, वहां अगले ही महीने फिर गड्ढे उभर आते हैं। विभागीय अधिकारी सड़क पर मरहम तो लगाते हैं, पर ज़ख्म हर बारिश में फिर खुल जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह सब बजट खपाओ अभियान बनकर रह गया है एक तरफ पेंच रिपेयरिंग होती है, दूसरी तरफ सड़कों की परत उखड़ जाती है, और फिर नई रिपेयरिंग के लिए प्रस्ताव बन जाता है।

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लोगों की जान जोखिम में, मगर विभाग मौन…!

खस्ताहाल सड़कों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। कई लोगों ने अपनी जानें गंवाईं, पर विभाग ने न तो कोई स्थायी मरम्मत कराई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की।
जब इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के मंत्री से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल तक रिसीव नहीं किया। सूत्र बताते हैं कि विभागीय अधिकारी अब पूरी तरह मनमानी पर उतरे हुए हैं न निरीक्षण, न जवाबदेही।

आखिर कब तक चलेगा पेंच रिपेयरिंग का भ्रष्टाचार..?

लोगों का कहना है कि अगर सड़कों की असली मरम्मत हो जाए, तो शायद बजट का आधा ही पैसा पर्याप्त हो। मगर हर बार पेंच रिपेयरिंग के नाम पर मोटी रकम खर्च होती है, जिससे जनता को सिर्फ धूल और गड्ढे ही नसीब होते हैं। ऐसे में सवाल यह है क्या यह पेंच रिपेयरिंग का खेल चलता रहेगा, या विभाग कभी सड़कों को वाकई चलने लायक बनाएगा…?

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