मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी- डीईओ रजनीश तिवारी_

मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी- डीईओ रजनीश तिवारी_
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 31 अक्टूबर 2025।मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों के बीच मरवाही विकासखंड से चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने आज मरवाही क्षेत्र के विभिन्न शासकीय स्कूलों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर खामियाँ और लापरवाहियाँ उजागर हुईं।निरीक्षण के दौरान सर्वप्रथम प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला घुसरिया पहुँचे जहाँ डीईओ ने कक्षा छठवीं और सातवीं के विद्यार्थियों से आज की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि “आज किसी भी शिक्षक द्वारा अध्यापन कार्य नहीं कराया गया।” इस जवाब से अधिकारी नाराज़ दिखे और तुरंत उपस्थिति पंजी की जांच की। जांच में पाया गया कि एक शिक्षक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित थे।
इसके बाद प्राप्त शिकायतों की पुष्टि के लिए डीईओ ने अन्य स्कूलों का भी निरीक्षण किया। शिकायतें थीं कि मरवाही विकासखंड के कई स्कूल निर्धारित समय से पहले ही बंद हो जाते हैं। जांच के दौरान पाया गया कि मिडिल स्कूल करसिवा में शाम 3:35 बजे ही बच्चों को बाहर निकालकर प्रार्थना कराई जा रही थी, जबकि विद्यालय का निर्धारित समय 4:00 बजे तक है। इसी तरह हाई स्कूल लरकेनी में भी 3:42 बजे ही बच्चों को बैग सहित बाहर कर प्रार्थना कराई जा रही थी।
इन सभी तथ्यों से यह स्पष्ट हुआ कि मरवाही विकासखंड में शैक्षणिक अनुशासन की गंभीर कमी है। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा“मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। जो भी शिक्षक और संस्था प्रमुख अपने दायित्वों में लापरवाही बरत रहे हैं, उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।”उन्होंने आगे बताया कि निरीक्षण में पाई गई सभी अनियमितताओं को लेकर संबंधित संस्था प्रमुखों को शो-कॉज नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि विकासखंड स्तर पर शिक्षा विभाग की निगरानी कमजोर है। कई अभिभावकों ने भी शिकायत की कि विद्यालयों में समय पर शिक्षक नहीं पहुँचते और कई बार बिना बताए स्कूल जल्दी बंद कर दिए जाते हैं।सूत्रों के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि मरवाही में पदस्थ दोनों विकासखंड शिक्षा अधिकारी अपने-अपने पद की सुरक्षा को लेकर अधिक चिंतित हैं और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के इर्द-गिर्द ही मंडराते रहते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर विद्यालयों की निगरानी और शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। जबकी जिले के शिक्षा विभाग का रिजल्ट का जिम्मा इन्हीं अधिकारियों के कंधों पर है
डीईओ तिवारी ने कहा कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य विकासखंडों में भी औचक निरीक्षण किए जाएंगे, ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाया जा सके और ऐसी लापरवाहियों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।





