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गौरेला-पेंड्रा में बिजली व्यवस्था फेल: शहर से गांव तक अंधेरे में जनता, मेंटनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ?

गौरेला-पेंड्रा में बिजली व्यवस्था फेल: शहर से गांव तक अंधेरे में जनता, मेंटनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ?

कोटमी/पेंड्रा/गौरेला/(जीपीएम)जिला मुख्यालय गौरेला और पेंड्रा में बिजली व्यवस्था की बदहाली अब गंभीर सवाल खड़े करने लगी है। शहर हो या गांव — हर जगह लोग घंटों बिजली कटौती और अव्यवस्थित सप्लाई से परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि कलेक्टर बंगले से महज 100 मीटर दूर स्थित वार्ड क्रमांक 10 दत्तात्रेय क्षेत्र तक रातभर अंधेरे में डूबा रहा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी बदतर बताई जा रही है।

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि गौरेला शहर के कई हिस्सों की बिजली सप्लाई आज भी ग्रामीण फीडर से जुड़ी हुई है। ऐसे में गांवों में कहीं भी लाइन फॉल्ट, ट्रिपिंग या तार टूटने की समस्या होती है तो उसका सीधा असर शहर के उपभोक्ताओं पर पड़ता है। बीती रात आए आंधी-तूफान के बाद शहर के अधिकांश हिस्सों में देर रात बिजली बहाल हो गई, लेकिन वार्ड क्रमांक 10 के लोग पूरी रात अंधेरे में रहे।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर कोटमी क्षेत्र के लोगों में भी बिजली विभाग को लेकर भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा अक्सर “मेंटेनेंस” के नाम पर दिनभर बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है, लेकिन उसके बावजूद हल्की बारिश या सामान्य हवा चलते ही बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है।

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लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह कैसा मेंटनेंस है, जिसमें घंटों बिजली बंद रखने के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आता? यदि नियमित मेंटनेंस किया जा रहा है तो फिर बार-बार फॉल्ट, ट्रिपिंग और लंबे समय तक ब्लैकआउट क्यों हो रहे हैं?
कोटमी क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बिना पूर्व सूचना के घंटों बिजली काट दी जाती है। गर्मी के मौसम में दिनभर बिजली गुल रहने से आम लोगों, किसानों और छोटे व्यवसायियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद विभाग की ओर से न तो कोई स्पष्ट जवाब दिया जाता है और न ही स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास दिखाई देते हैं।
स्थिति इतनी विडंबनापूर्ण हो चुकी है कि शहर में घरों की बिजली गुल रहती है लेकिन स्ट्रीट लाइटें जलती रहती हैं, वहीं गांवों में मेंटनेंस के नाम पर बिजली काटकर लोगों को सिर्फ परेशानी दी जा रही है। लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग अब केवल बिल वसूली तक सीमित होकर रह गया है, जबकि व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी पूरी तरह नजरअंदाज की जा रही है।
बिजली शिकायतों को लेकर भी हालात खराब हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली बिल में दिए गए शिकायत नंबर या तो बंद रहते हैं या कॉल रिसीव नहीं की जाती। ऐसे में लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर समस्या होने पर वे अपनी शिकायत किससे करें?
अब जनता पूछ रही है — आखिर कब सुधरेगी बिजली व्यवस्था..? क्या मेंटनेंस सिर्फ कागजों और दिखावे तक सीमित है? और क्या शहर से लेकर गांव तक लोगों को इसी तरह अंधेरे और अव्यवस्था में जीने के लिए मजबूर रहना पड़ेगा..?

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