
गौरेला में BEO पर फिर लगे रिश्वतखोरी के आरोप, सेवानिवृत्त प्रधान पाठक ने GPF दिलाने के नाम पर 80 हजार वसूली का लगाया आरोप
“राशि देने के बाद भी नहीं हुआ भुगतान”—पीड़ित ने DEO से की शिकायत, जांच की मांग तेज

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विकासखंड गौरेला के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) संजीव शुक्ला पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जो थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ताजा मामला एक सेवानिवृत्त प्रधान पाठक परसराम सिंद्राम से जुड़ा है, जिन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी वैधानिक भविष्य निधि (Provident Fund) की राशि दिलाने के नाम पर उनसे अवैध रूप से पैसे की मांग की गई।
शिकायत के अनुसार, परसराम सिंद्राम 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे और इसके बाद उन्हें उनकी भविष्य निधि की राशि प्राप्त होनी थी। लेकिन भुगतान प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जाती रही। पीड़ित ने दावा किया है कि उन्होंने दबाव में आकर अब तक करीब 80,000 रुपये का भुगतान कर दिया, इसके बावजूद उनकी पूरी राशि का भुगतान नहीं किया गया और आगे भी पैसे की मांग जारी है।
पीड़ित ने अपने आवेदन में स्पष्ट लिखा है कि यह कृत्य न केवल अवैध है, बल्कि भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है और उनके लिए अत्यंत अपमानजनक स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने अपने सेवा काल में ईमानदारी से कार्य करने का हवाला देते हुए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
इस मामले में पीड़ित ने जिला शिक्षा अधिकारी से निष्पक्ष एवं शीघ्र जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा बिना किसी अवैध मांग के उनकी भविष्य निधि की राशि जल्द दिलाने की मांग की है। साथ ही, दिए गए 80 हजार रुपये की भी जांच कर न्याय दिलाने की अपील की गई है।
शिकायत की एक प्रति कलेक्टर कार्यालय को भी भेजी गई है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

जिले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर पहले भी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में लगातार सामने आ रहे ये नए आरोप विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और क्या पीड़ित को समय रहते न्याय मिल पाता है या नहीं।
















