
लल्लनगुरु न्यूज़ और रितेश गुप्ता की शिकायत सही पाई गई! डी.पी. विप्रा लॉ कॉलेज में प्रवेश अनियमितता का खुलासा, 44 विद्यार्थियों के दाखिले पर विश्वविद्यालय की जांच में नियमों के उल्लंघन का उल्लेख
जिस गड़बड़ी को लेकर उठाई गई थी आवाज, विश्वविद्यालय की जांच समिति के प्रतिवेदन में सामने आया प्रवेश नियमों का उल्लंघन; कुलसचिव ने उच्च शिक्षा संचालनालय से मांगी कार्रवाई।

बिलासपुर। डी.पी. विप्रा विधि महाविद्यालय में बी.ए.एलएल.बी. प्रवेश प्रक्रिया को लेकर लल्लनगुरु न्यूज़ और पत्रकार रितेश गुप्ता द्वारा उठाए गए सवालों पर अब विश्वविद्यालय के आधिकारिक दस्तावेज ने गंभीर तथ्य सामने रखे हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में मेरिट और आरक्षण नियमों की कथित अनदेखी को लेकर की गई शिकायत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय की जांच समिति ने अपने प्रतिवेदन में 44 छात्र-छात्राओं को प्रवेश नियमों का उल्लंघन करते हुए दाखिला दिए जाने का उल्लेख किया है।
4 नवंबर 2026 को विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने आयुक्त, उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर को आधिकारिक पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। इससे स्पष्ट है कि शिकायत में उठाया गया प्रवेश अनियमितता का मुद्दा विश्वविद्यालय की जांच में भी सामने आया है। अब सवाल केवल शिकायत का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और कार्रवाई का है।

शिकायत में उठाए गए सवालों को विश्वविद्यालय की जांच से मिला आधार
लल्लनगुरु न्यूज़ ने डी.पी. विप्रा लॉ कॉलेज की प्रवेश प्रक्रिया में मेरिट सूची को लेकर सवाल उठाए थे। शिकायतकर्ता रितेश गुप्ता ने आरोप लगाया था कि अधिक अंक प्राप्त करने वाले पात्र अभ्यर्थियों को प्रवेश से वंचित रखा गया, जबकि उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को दाखिला दिया गया।

अब विश्वविद्यालय के पत्र में जांच समिति के प्रतिवेदन का हवाला देते हुए 44 विद्यार्थियों के प्रवेश में नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा है कि इस प्रक्रिया के कारण नियमानुसार प्रावीण्यता और आरक्षण के आधार पर प्रवेश पाने के पात्र अभ्यर्थी प्रवेश से वंचित रह गए।
24 जुलाई से खुली प्रवेश व्यवस्था, 44 दाखिलों पर उठे सवाल
विश्वविद्यालय के दस्तावेज में उल्लेख है कि महाविद्यालय ने 24 जुलाई 2026 से खुली प्रवेश व्यवस्था के तहत प्रावीण्यता और आरक्षण नियमों का पालन किए बिना विद्यार्थियों को प्रवेश दिया। जबकि प्रवेश की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित थी। विद्यार्थियों से 8 अगस्त 2026 तक प्रवेश शुल्क भी जमा कराया गया।
विश्वविद्यालय ने इन तथ्यों को दस्तावेजी साक्ष्यों से प्रमाणित बताया है। यही वजह है कि अब पूरे प्रवेश सत्र की प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग तेज हो गई है।
अब जिम्मेदार कौन? उच्च शिक्षा संचालनालय के सामने बड़ा सवाल
विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा था। महाविद्यालय ने 6 अक्टूबर को एक सप्ताह का समय मांगा और 16 अक्टूबर को अपने स्तर पर जांच समिति गठित करने की सूचना दी। लेकिन विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने महाविद्यालय की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया और मामले को उच्च शिक्षा संचालनालय तक पहुंचाया।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस मामले में किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करता है और क्या पूरे प्रवेश सत्र के मूल दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराई जाती है।
राजनीतिक सिफारिश और आर्थिक लेन-देन के आरोपों की भी जांच हो
शिकायतकर्ता ने प्रवेश प्रक्रिया में कथित राजनीतिक सिफारिश और आर्थिक लेन-देन की आशंका भी जताई थी। विभागाध्यक्ष संतोष ठाकुर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विश्वविद्यालय के पत्र में भी इनकी पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन पहलुओं की अलग से निष्पक्ष जांच जरूरी है।
लल्लनगुरु न्यूज़ की मुहिम के बाद अब कार्रवाई की बारी
इस पूरे मामले में लल्लनगुरु न्यूज़ और पत्रकार रितेश गुप्ता द्वारा उठाए गए सवालों के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर जांच हुई और अब आधिकारिक पत्र उच्च शिक्षा संचालनालय तक पहुंच चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या 44 विद्यार्थियों के प्रवेश में नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? क्या मेरिट से वंचित अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा? क्या प्रवेश से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे?
शिकायत में उठाया गया प्रवेश अनियमितता का मुद्दा विश्वविद्यालय की जांच में सामने आया है। अब उच्च शिक्षा संचालनालय की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष जांच के आधार पर दोषियों की जवाबदेही तय करे।















