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कानून जंगल में खो गया? वन विभाग में फर्जी नौकरी, जांच आदेश की हत्या बना तमाशा मरवाही वनमंडल अधिकारी की मनमर्जी

मिथलेश आयम की रिपोर्ट, गौरेला–पेंड्रा–मरवाही(खबरो का राजा) : वन विभाग, जहाँ जंगलों की रक्षा होनी चाहिए, वहीं अब कानून और आदेशों की खुलेआम हत्या होती नजर आ रही है। गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के वन विभाग में कई कर्मचारी फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे सरकारी नौकरी कर रहे हैं यह आरोप नहीं, बल्कि लिखित शिकायत के बाद सामने आया गंभीर मामला है।शिकायत के बाद जिला कलेक्टर ने अनुमोदना दी, डिप्टी कलेक्टर ने स्पष्ट जांच आदेश जारी किया,

लेकिन सवाल यह है :-

👉 मरवाही वनमंडल अधिकारी ने आदेश का पालन क्यों नहीं कि..? आरोप है कि जांच को जानबूझकर लटकाया गया,

दस्तावेजों का वास्तविक सत्यापन नहीं हुआ, और पूरा मामला खानापूर्ति और लीपापोती में बदल दिया गया।यानी :- 

❌ जांच नहीं

❌ कार्रवाई नहीं

❌ जवाबदेही नहीं

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कर्मचारियों पर फर्जी प्रमाण पत्रों से नौकरी करने का आरोप है, वे आज भी उसी कुर्सी पर जमे हुए हैं, सरकारी वेतन ले रहे हैं, और सिस्टम पर हंस रहे हैं।

अब इस मामले में जिले में सीधी और सख्त कार्रवाई की मांग हो गई है।

👉 फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले कर्मचारियों पर तत्काल FIR दर्ज की जाए।

👉 जांच आदेश की अवहेलना करने पर मरवाही वनमंडल अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए।

👉 पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

यदि जिला प्रशासन अब भी मौन रहा, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशासनिक आदेश केवल कागजों तक सीमित हैं और फर्जीवाड़ा सिस्टम से ज्यादा ताकतवर हो चुका है। यह मामला अब केवल विभागीय नहीं, बल्कि प्रशासन की साख और कानून के राज की परीक्षा बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर फर्जीवाड़े और आदेशों की अवहेलना का यह खेल यूँ ही चलता रहेगा।

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