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उदरदहा आस्था, प्रकृति और पर्यटन की त्रिवेणी, फिर भी विकास से कोसों दूर जिला प्रशासन से जनपद उपाध्यक्ष और जनप्रतिनिधियों ने पर्यटन स्थल की किए मांग..?

मिथलेश आयम की ग्राउंड रिपोर्ट,(खबरो का राजा) : छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 130 किलोमीटर दूर, पसान बस स्टैंड से महज 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उदरदहा आज अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगल, शांत वातावरण और धार्मिक आस्था से जुड़ा यह क्षेत्र वर्षों से पिकनिक स्पॉट और छोटे पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन प्रशासनिक अनदेखी ने इसे विकास की दौड़ से बाहर कर दिया है। उदरदहा की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थित प्राचीन शेषनाग देव मंदिर है, जिसकी मान्यता सदियों पुरानी बताई जाती है। आसपास के जिलों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नए वर्ष के आगमन पर यहां जो नजारा देखने को मिला, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी। सैकड़ों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु उमड़े, लेकिन सुविधाओं के नाम पर अव्यवस्था ही हाथ लगी। न सड़क की उचित व्यवस्था, न पार्किंग की सुविधा, न शौचालय, न पीने का पानी और न ही सुरक्षा के इंतज़ाम। सवाल यह उठता है कि जब जनता खुद किसी स्थल को पर्यटन केंद्र बना रही है, तो शासन-प्रशासन किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या किसी हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी? इसी हालात को देखते हुए जनपद उपाध्यक्ष प्रकाशचंद जाखड़ सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन के समक्ष उदरदहा को बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पुरज़ोर मांग रखी है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि यहां सड़क, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, विश्राम स्थल और मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं, तो यह क्षेत्र न सिर्फ धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन का ध्यान आकर्षित करे और उदरदहा को आधिकारिक पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया शुरू करे। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खो देगी।

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