कोटा विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी की खामोशी बनी ढाल, मांझाभाटा(पहन्दा) स्कूल में बच्चों के सामने लटकता रहा ताला

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर :- जिले की कोटा विकासखंड का ग्राम पंचायत मांझाभाटा (पहन्दा) स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मांझाभाटा (पहन्दा), संकुल केंद्र कोनचरा में शिक्षकों की मनमानी और घोर लापरवाही सामने आ रही है। शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश हैं कि शनिवार को विद्यालय सुबह 8:00 बजे खुले, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलटा है। ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान यह पाया गया कि सुबह 8:18 तक विद्यालय का ताला नहीं खुला था। सवाल यह है कि जब विद्यालय ही समय पर नहीं खुलता, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? विद्यालय समय और अनुशासन अब मज़ाक बनकर रह गया है। बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचकर इंतजार करना पड़ता है, जबकि जिम्मेदार शिक्षक अपनी मनमर्जी से विद्यालय पहुंचते हैं या पहुंचते ही नहीं। जब इस गंभीर विषय पर संकुल प्रभारी संजय रजक से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उनका मोबाइल लंबे समय तक बंद मिला। लगातार प्रयास के बाद दोपहर 12:15 तक मे संपर्क हुआ फिर उन्होंने गोलमोल जवाब देकर मामले से बचने की कोशिश की। अपने बयान में उन्होंने बताया कि प्रधान पाठक लक्ष्मी नारायण बंजारे विद्यालय पहुंच गए थे, लेकिन सुबह 8:40 तक कोई अन्य शिक्षक नहीं आया न ही प्रधान पाठक स्कूल पहुंचे। वहीं शिक्षक सुखनंदन सिंह पैकरा के छुट्टी पर होने की बात कही गई। सवाल यह है कि यदि शिक्षक अनुपस्थित थे, तो इसकी सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? जब इस पूरे मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने केवल “देखने” की बात कहकर चुप्पी साध ली। जब अधिकारी ही आंख मूंदे बैठे हों, तो कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम कैसे लगेगी? यह लापरवाही केवल शिक्षकों की नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की नाकामी को उजागर करती है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन ऐसे लापरवाह शिक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





