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“नियमों की धज्जियां उड़ाकर पहले ही करा दिया पेपर! केंदा स्कूल कांड ने उजागर की शिक्षा विभाग की पोल”

तय तिथि से पहले परीक्षा, शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला! 11वीं गणित पेपर से मचा हड़कंप 

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) / कोटा।शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोटा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केंदा में कक्षा 11वीं के गणित विषय की परीक्षा निर्धारित तिथि से पहले आयोजित किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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आधिकारिक समय-सारणी के अनुसार कक्षा 11वीं का गणित पेपर 09 अप्रैल 2026 को आयोजित होना था, लेकिन केंदा स्कूल में इसे 04 अप्रैल 2026 को ही करा दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि उसी दिन कोटा विकासखंड के अन्य किसी भी विद्यालय में यह परीक्षा आयोजित नहीं हुई, जिससे मामला और भी संदिग्ध हो गया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह मामला पेपर लीक से जुड़ा है या फिर यह शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही का उदाहरण है? किसके आदेश पर निर्धारित तिथि से पहले परीक्षा ली गई? क्या अन्य छात्रों के साथ अन्याय नहीं हुआ? यदि प्रश्नपत्र पहले ही उपयोग में आ चुका है, तो उसकी गोपनीयता खत्म हो जाती है, जिससे पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होती है।

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मामले में जब विद्यालय प्रबंधन से बात की गई, तो प्राचार्य मलिंडा मिंज और व्याख्याता सी.आर. मार्को ने कहा कि “पेपर दोबारा करवा दिया जाएगा।” हालांकि, इस जवाब से नाराज़गी और बढ़ गई है। अभिभावकों का कहना है कि इतनी बड़ी गलती के बाद केवल पुनः परीक्षा कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी जरूरी है।

यह घटना शिक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियों को उजागर करती है—विभागीय आदेशों की अनदेखी, परीक्षा प्रणाली में लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता। इस तरह की घटनाएं सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और शिक्षा व्यवस्था पर से भरोसा कमजोर करती हैं।

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अब पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका अहम हो गई है। लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह दबा दिया जाएगा।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए

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