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“साड़ी खरीदी में संगठित लूट! DMF घोटाले के आरोपी को ठेका, विभागीय मिलीभगत का खुला खेल”

साड़ी खरीदी में संगठित लूट! DMF घोटाले के आरोपी को ठेका, विभागीय मिलीभगत का खुला खेल”

साड़ी खरीदी में कमीशनखोरी का बड़ा खेल! DMF घोटाले के आरोपी को मिला वर्कऑर्डर, तत्कालीन संचालक पर संलिप्तता के आरोप

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रायपुर, 25 अप्रैल 2026।महिला एवं बाल विकास विभाग में साड़ी खरीदी को लेकर एक और बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदी गई साड़ियों में गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब 2025-26 की प्रस्तावित खरीदी भी विवादों में घिर गई है। मामले में जांच के आदेश जारी होने के बाद फिलहाल टेंडर और वर्कऑर्डर प्रक्रिया को रोक दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, विभाग ने वर्ष 2024-25 में करीब 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साड़ियों की खरीदी ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से की थी। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने सीधे खरीदी न करते हुए पूरी राशि ग्रामोद्योग बोर्ड को ट्रांसफर कर दी। इसके बाद ग्रामोद्योग बोर्ड ने चार अलग-अलग फर्मों को सप्लाई का जिम्मा सौंपा।

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इन फर्मों में छत्तीसगढ़ ग्रामोद्योग वस्त्र भंडार अभनपुर, जागृति उद्योग धमतरी, छाया ग्रामोद्योग रायपुर और आकाश ग्रामोद्योग रायपुर शामिल हैं। हालांकि, जांच में सामने आया है कि इन सभी फर्मों का संचालन कथित रूप से एक ही व्यक्ति—केतन दोषी—द्वारा किया जा रहा है। पड़ताल के दौरान केवल जागृति उद्योग धमतरी की ही स्पष्ट जानकारी सामने आ सकी, जबकि अन्य फर्मों का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला।

सूत्रों का दावा है कि इस पूरे खरीदी प्रकरण में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हुई है। आरोप है कि तत्कालीन संचालक पदुम सिंह एल्मा, जो उस समय ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक भी थे, ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए विभागीय राशि ग्रामोद्योग बोर्ड को ट्रांसफर की और वहीं से इन चयनित फर्मों को कार्यादेश जारी कर दिए।

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मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि कथित सप्लायर केतन दोषी पहले से ही डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) घोटाले में आरोपी रहा है। नवंबर 2025 में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा उसके धमतरी स्थित निवास पर छापेमारी भी की गई थी, जिसमें कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए थे।

अब एक बार फिर उसी व्यक्ति को सरकारी खरीदी में काम मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। विभाग में मचे हड़कंप के बीच शासन स्तर पर जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राज्य के सबसे बड़े खरीदी घोटालों में शामिल हो सकता है।

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