
युक्तियुक्तकरण-पदोन्नति मामले में बड़ी कार्रवाई! जांच के बाद बाबू सुनील यादव निलंबित
अंकित गौरहा की शिकायतों के बाद जांच आगे बढ़ी, विभागीय आदेश में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता का उल्लेख

बिलासपुर। जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामलों को लेकर चल रही शिकायतों के बीच अब विभागीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई है। कनिष्ठ लेखा परीक्षक सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 30 सितंबर 2026 को जारी जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर के आदेश में जांच समिति की रिपोर्ट, संबंधित अभिलेखों के परीक्षण और जवाब का उल्लेख करते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है।
जारी आदेश के अनुसार, सुनील कुमार यादव के विरुद्ध युक्तियुक्तकरण एवं संशोधित पदोन्नति प्रकरण में अनियमितता संबंधी शिकायत सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से जिला शिक्षा कार्यालय को प्राप्त हुई थी। मामले की जांच तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई। समिति की रिपोर्ट 31 अगस्त और 23 सितंबर 2026 को प्रस्तुत की गई। इसके बाद संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ सूचना जारी की गई, लेकिन विभाग के अनुसार प्रस्तुत जवाब संतोषप्रद नहीं पाया गया।

जांच रिपोर्ट के बाद विभाग का बड़ा कदम
जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश में कहा गया है कि कार्यालयीन दायित्वों के निर्वहन में घोर अनियमितता तथा जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रथम दृष्ट्या संलिप्तता पाए जाने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सेजेस बहतराई, विकासखंड बिल्हा, जिला बिलासपुर निर्धारित किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

अंकित गौरहा की शिकायतों से उठे थे सवाल
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस नेता अंकित गौरहा पूर्व में कई शिकायतें कर चुके हैं। अगस्त 2026 में भी उन्होंने जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामलों के अभिलेखों की जांच की मांग की थी। गौरहा की ओर से की गई शिकायतों में मूल नस्ती, नोटशीट, पत्राचार, पदोन्नति एवं वरिष्ठता सूची तथा पदस्थापना से संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग उठाई गई थी। बाद में सुनील यादव की भूमिका को लेकर भी सवाल सामने आए थे।
अब आगे किसकी तय होगी जवाबदेही?
सुनील यादव के निलंबन के बाद अब विभागीय कार्रवाई की अगली कड़ी पर निगाहें टिक गई हैं। शिकायतों में जिन अन्य प्रकरणों और अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, उनकी जांच किस स्तर तक पहुंचती है और क्या आगे भी जिम्मेदारी तय होती है—यह आने वाली कार्रवाई से स्पष्ट होगा।
अंकित गौरहा ने पूर्व में कहा था कि शिकायतों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और प्रभावित शिक्षकों को उनका अधिकार दिलाना है। उन्होंने पदोन्नति, पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण से जुड़े मामलों में नियमों के अनुसार जवाबदेही तय करने की मांग की थी।
अब बड़ा सवाल यही है—जांच की यह कार्रवाई सुनील यादव के निलंबन तक सीमित रहेगी या युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति से जुड़े पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी भी तय होगी?















