
कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी! मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू नहीं होने से नाराज कर्मचारी संगठन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में हुई कैबिनेट बैठक से प्रदेश के कर्मचारी संगठनों को कर्मचारियों से जुड़ी लंबित मांगों पर निर्णय की उम्मीद थी, लेकिन कर्मचारी संगठनों के मुताबिक बैठक में उनकी प्रमुख मांगों को शामिल नहीं किया गया। खासतौर पर मेडिकल कैशलेस चिकित्सा सुविधा को लेकर कर्मचारियों में निराशा और नाराजगी देखी जा रही है।

मेडिकल कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ कैशलेस चिकित्सा सेवा कर्मचारी कल्याण संघ पिछले करीब तीन वर्षों से लगातार प्रयासरत है। संगठन का कहना है कि बजट सत्र में कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान/घोषणा किए जाने के बाद कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जल्द ही यह सुविधा धरातल पर लागू होगी। हालांकि, संगठन के अनुसार अब तक इसका वास्तविक लाभ कर्मचारियों और उनके परिवारों को नहीं मिल पाया है।
संघ का कहना है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू होने से प्रदेश के कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी गंभीर बीमारी अथवा उपचार के दौरान आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकती है। लेकिन लंबे समय से मांग लंबित रहने के कारण कर्मचारी परिवारों में असंतोष बढ़ रहा है।

कैबिनेट बैठक में इस विषय पर निर्णय नहीं होने के बाद संघ ने अपना विरोध दर्ज कराने का फैसला लिया है। 2 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से विरोध दर्ज कराया जाएगा, जबकि 3 अक्टूबर को प्रदेशभर के कर्मचारी काली पट्टी लगाकर कार्यालयों में कार्य करते हुए अपना विरोध जताएंगे।
संघ की ओर से प्रदेश अध्यक्ष उषा चंद्राकर एवं संरक्षक राकेश सिंह ने प्रदेश के कर्मचारियों से विरोध कार्यक्रम में सहभागिता करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांग स्पष्ट है कि बजट में घोषित कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था को जल्द से जल्द धरातल पर लागू किया जाए।

संघ ने उम्मीद जताई है कि शासन कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द इस दिशा में ठोस निर्णय करेगा। वहीं, विरोध कार्यक्रम की जानकारी प्रदेश संयोजक पीयूष कुमार गुप्ता द्वारा दी गई।
संघ का संदेश:
✊ कर्मचारी एकता—हमारी आवाज
✊ कैशलेस चिकित्सा—कर्मचारी परिवार की मांग















