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एक करोड़ की रोशनी ‘गायब’—बंजारी पंचायत में 135 सोलर-हाईमास्ट लाइट का खेल, कागजों में विकास और जमीन पर अंधेरा; भुगतान पूरा, काम शून्य

एक करोड़ की रोशनी ‘गायब’—बंजारी पंचायत में 135 सोलर-हाईमास्ट लाइट का खेल, कागजों में विकास और जमीन पर अंधेरा; भुगतान पूरा, काम शून्य

एक करोड़ का अंधेरा: बंजारी पंचायत में सोलर लाइट घोटाला, कागजों में विकास—जमीन पर सन्नाटा

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135 सोलर व हाईमास्ट लाइट के नाम पर करोड़ों का भुगतान, गांव आज भी अंधेरे में; जांच और एफआईआर की उठी मांग

कोरबा। जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजारी में विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सोलर स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च दिखा दी गई, लेकिन हकीकत यह है कि गांव में कहीं भी इन कार्यों का कोई ठोस अस्तित्व नजर नहीं आता। इस पूरे मामले ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत बंजारी में 126 सोलर स्ट्रीट लाइट और 9 हाईमास्ट लाइट (कुल 135 नग) लगाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया था। इस कार्य को ग्रामीण क्षेत्र में रोशनी और सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से प्राथमिकता दी गई थी। लेकिन जिस तरह से इस योजना को कागजों में ही पूरा दिखा दिया गया, उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।

सूत्रों के मुताबिक इस कार्य के लिए तीन किश्तों में पूरी राशि जारी की गई—

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30 जुलाई 2022 को पहली किश्त के रूप में 90,38,400 रुपये,

16 सितंबर 2022 को दूसरी किश्त 16,94,700 रुपये,

और 15 अक्टूबर 2022 को तीसरी किश्त 5,64,900 रुपये जारी की गई।

इस तरह कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मौके पर कार्य का कोई निशान तक नहीं है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आज भी रात होते ही घुप्प अंधेरा छा जाता है। यदि वास्तव में 135 सोलर और हाईमास्ट लाइट लगाई गई होतीं, तो गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल जाती। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि विकास कार्य केवल कागजों में ही सीमित रहा।

आरोप यह भी है कि ओरी ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर चेक के माध्यम से भुगतान किया गया और कार्य को बिना पूर्ण किए ही पूरा दर्शा दिया गया। इस पूरे मामले में पंचायत प्रतिनिधियों, संबंधित अधिकारियों और सप्लायर के बीच मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

पंचायत व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास योजनाओं में संभावित अनियमितताओं की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना भौतिक सत्यापन के इतनी बड़ी राशि कैसे जारी कर दी गई? क्या भुगतान से पहले स्थल निरीक्षण नहीं किया गया? या फिर यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया खेल है?

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल सरकारी धन की भारी बर्बादी है, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों और विश्वास के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।

जांच और एफआईआर की मांग तेज

युवा कांग्रेस नेता मधुसूदन दास ने इस मामले को लेकर संबंधित विभागों को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता का है और इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने शासन के धन के दुरुपयोग को देखते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग भी उठाई है।

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