भ्रष्टाचार की नींव पर नौनिहालों का भविष्य? पसान में 87 लाख के स्कूल निर्माण में ‘सफेद भ्रष्टाचार’ का खेल

मिथलेश आयम, पसान।कोरबा : नौनिहालों के बेहतर भविष्य और शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकारें पानी की तरह पैसा बहा रही हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के घुन इस पूरी व्यवस्था को अंदर ही अंदर खोखला करने में जुटे हैं। ताजा और बेहद शर्मनाक मामला पसान का है, जहां ₹87.29 लाख की भारी-भरकम लागत से बन रहा नवीन स्कूल भवन निर्माण शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता की खुलेआम धज्जियां उड़ाने और सरकारी धन की “नग्न लूट” का सीधा आरोप लगाया है।
कागजों पर ‘चमकता’ काम, धरातल पर ‘घटिया’ अंजाम
ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है। उनका साफ कहना है कि निर्माण स्थल पर घटिया दर्जे की ईंटें, अमानक रेत और नाममात्र के सीमेंट का घोल मिलाकर दीवारों को खड़ा किया जा रहा है। निर्माण के जो कड़े मापदंड शासन द्वारा तय किए गए हैं, उन्हें ताक पर रख दिया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया ”जिम्मेदार विभाग के इंजीनियर और निर्माण एजेंसी की आपसी जुगलबंदी से सरकारी खजाने को चूना लगाने का यह काला खेल खुलेआम चल रहा है। अफसरों की जेबें गरम हैं, इसलिए जनता के पैसों पर डाका डाला जा रहा है।”

…तो साहब ‘कमीशन’ के खेल में आंखें मूंदे बैठे हैं?
सबसे बड़ा और तीखा सवाल विभागीय अधिकारियों की नीयत पर खड़ा होता है। लाखों रुपये की इस संवेदनशील परियोजना की मॉनिटरिंग करने वाले साहब आखिर किस मलाई के चक्कर में आंखें मूंदे बैठे हैं? क्या उन्हें धरातल पर हो रहा यह भ्रष्टाचार दिखाई नहीं दे रहा, या फिर वे देखना ही नहीं चाहते? अगर यह भवन पहली ही बारिश में भरभराकर गिर गया और कोई बड़ा हादसा हो गया, तो क्या ये ठेकेदार और सुस्त अधिकारी उसकी जिम्मेदारी लेंगे
















