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​नवाडीह स्कूल में अनुदान राशि की बंदरबांट, फर्जी बिलों के सहारे सरकारी खजाने पर डाका!

जीशान अंसारी, बेलगहना/​बिलासपुर : ​शिक्षा के मंदिर को संवारने के लिए सरकार जो पैसा भेजती है, उस पर भ्रष्टाचार के दीमक ने अपनी नजरें गड़ा दी हैं। ताजा मामला कोटा विकासखंड के संकुल बानाबेल के अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला नवाडीह का है। यहाँ शाला अनुदान और अन्य मदों की राशि में जमकर हेरफेर और कथित तौर पर फर्जी बिलों के सहारे सरकारी धन की “बंदरबांट” किए जाने की गंभीर शिकायत सामने आई है। इस खुलासे के बाद पूरे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

​अंधेर नगरी, चौपट राजा: बिना नंबर और तारीख के पास हो गए बिल :- 

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​शासकीय नियमों को ताक पर रखकर किस कदर मनमानी की गई है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन बिलों के सहारे सरकारी खजाने से पैसे निकाले गए, उनमें न तो कोई बिल क्रमांक है और न ही तारीख का कोई अता-पता है। कई बिलों में तो उस संस्था या स्कूल का नाम तक नहीं लिखा है, जिसके लिए सामान खरीदा गया। यह सीधे तौर पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन और वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है।

​भ्रष्टाचार का अजूबा, किराना दुकान से प्रिंटिंग, दुकान में मशीन ही गायब :- 

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​इस पूरे घालमेल में जालसाजी का एक अनोखा कारनामा भी सामने आया है। 19 मार्च 2026 को ‘कमल किराना एवं फोटोकॉपी जनरल स्टोर’ के नाम से बकायदा 300 और 500 रुपये के फोटो प्रिंट के बिल लगाए गए हैं। मज़ेदार बात यह है कि धरातल पर यह महज़ एक छोटी सी किराना दुकान है, जहाँ फोटोकॉपी या प्रिंटिंग की कोई मशीन ही मौजूद नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि जिस दुकान में मशीन ही नहीं है, वहाँ से प्रिंटिंग के बिल कैसे बन गए?

​ग्रीन कारपेट और गमलों की आड़ में खेल :-

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​भ्रष्टाचार की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। ‘न्यू आर.के. स्टेशनरी’ और ‘अनिल क्लॉथ स्टोर रतनपुर’ जैसी दुकानों के नाम से ग्रीन कारपेट, बैनर और गमलों की भारी-भरकम खरीदी दिखाई गई है। इन बिलों में भी भारी विसंगतियां हैं। साफ़ तौर पर दिख रहा है कि सरकारी राशि को ठिकाने लगाने के लिए सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए गए हैं।

​ग्रामीणों में आक्रोश “क्या बच्चों के हक पर डाका डालने वालों पर होगी कार्रवाई” :- 

मामला उजागर होने के बाद से नवाडीह के ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि बच्चों की बेहतर शिक्षा और स्कूल की व्यवस्था के लिए आने वाले पैसों को अफसर और जिम्मेदार मिलकर डकार रहे हैं। अब देखना यह है कि बिलासपुर का शिक्षा विभाग इस गंभीर शिकायत पर लीपापोती करता है या दोषियों पर होंगी सख्त कार्यवाही..? 

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