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पीएम आवास की आड़ में जंगलों पर ‘कुल्हाड़ी’: ठेकेदार शिवमान सिंह खुशरो का कारनामा, 141 नग अवैध बल्ली जप्त

फ़ाइल फोटो विभागीय पंचनामा के आधार पर :- 

जीशान अंसारी, कोटा/खोंगसरा। सरकारी योजनाओं की आड़ में हरे-भरे जंगलों को साफ करने वाले लकड़ी माफिया के खिलाफ वन विभाग ने आखिरकार एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कोटा वनमंडल के ग्राम तुमाडबरा (पंचायत खोंगसरा) में विभागीय टीम ने छापा मारकर अवैध रूप से काटी गई विभिन्न प्रजातियों की 141 नग कीमती बल्लियां जप्त की हैं। प्राथमिक जांच में जो सच सामने आया है, वह चौंकाने वाला है इन लकड़ियों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्य में खपाने की तैयारी थी। विभाग ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ वन अपराध का मामला दर्ज कर लिया है।शिकायत पर ‘एक्शन’: 18 जून को दबिश, सागौन और साल की बल्लियां बरामद :-

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​विभाग को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि वनग्रामों में चल रहे निर्माण कार्यों की आड़ में जंगलों से अंधाधुंध पेड़ काटे जा रहे हैं। इसी सूचना पर 18 जून को विभागीय अमले ने तुमाडबरा में अचानक धावा बोला। मौके से सागौन के 4 नग, साल के 2 नग, साजा के 2 नग और धौरा के 1 नग सहित भारी मात्रा में बेशकीमती लकड़ियों का जखीरा बरामद किया गया। वन विभाग ने सभी 141 नग बल्लियों को कुरकी कर वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है।गरीब के आशियाने की आड़ में ठेकेदार का ‘खेल’ :- 

​विभागीय पूछताछ में इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है। जप्त लकड़ियां ग्राम की ही ‘बजरहीन बाई बैगा’ के आवास निर्माण स्थल पर डंप की गई थीं। जब कड़ाई से पूछताछ हुई, तो हितग्राही ने कबूला कि यह लकड़ी आवास निर्माण का ठेका लेने वाले ठेकेदार शिवमान सिंह खुशरो ने लाकर रखवाई थी। सरकारी पैसों की मलाई खाने और अपनी जेब भरने के लिए ठेकेदार ने सीधे जंगलों पर ही डाका डाल दिया। अब वह वन विभाग के रडार पर है।फील्ड से ‘लापता’ अफसर: वन विकास निगम की भूमिका संदिग्ध :- 

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​इस पूरे मामले ने वन विकास निगम (कारपोरेशन) के मैदानी अमले की कार्य को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिस जंगल से ये पेड़ काटे गए, वह निगम के अधीन आता है। कटाई की लाइव सूचना देने के बाद भी निगम के कुंभकर्णी नींद में सोए अफसर मौके पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने तीखा आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी अपने मुख्यालय या तय कार्यक्षेत्र में रहते ही नहीं हैं। जब रक्षक ही क्षेत्र से नदारद रहेंगे, तो भक्षक जंगलों को क्यों नहीं उजाड़ेंगे? नियमित निगरानी के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।

​इनकी मुस्तैदी से हुई कार्रवाई :- 

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​इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में डिप्टी रेंजर नरेंद्र बैसवाड़े, वनरक्षक कुंजबिहारी पोर्ते, शिव पैकरा, टीकाराम जायसवाल और रामकुमार सहित अन्य विभागीय कर्मचारी शामिल रहे। टीम ने मौके पर ही पंचनामा तैयार कर वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

​तफ्तीश जारी है…

​”जप्त की गई लकड़ियों के स्रोत की गहराई से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध कटाई के पीछे और कौन-से बड़े चेहरे शामिल हैं। वन अधिनियम के तहत ठेकेदार और दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो मिसाल बने।”

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